रविवार, 18 अक्टूबर 2026

दिल्ली NCR में आया भूंंकप, 11 दिन में दूसरी बार झटके !

Written by: सुनील कुमार

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दिल्ली NCR: भारत में कई जगह भूकंप के तेज झटके शनिवा को महसूस किए गए। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान भूकंप का केंद्र था तथा इसकी तीव्रता 5.8 रही । पाकिस्तान…


दिल्ली एनसीआर में आया भूंंकप, 11 दिन में दूसरी बार झटके
दिल्ली एनसीआर में आया भूंंकप, 11 दिन में दूसरी बार झटके
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दिल्ली NCR: भारत में कई जगह भूकंप के तेज झटके शनिवा को महसूस किए गए। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान भूकंप का केंद्र था तथा इसकी तीव्रता 5.8 रही । पाकिस्तान में शनिवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। भारत के सीमाई इलाकों तक भी भूकंप का असर देखा गया है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलजी के मुताबिक भूकंपी की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.8 थी। हालांकि दिल्ली NCR   में अब तक किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है।

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सुबह करीब 10 बजे बलूचिस्तान प्रांत में खुजदार शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूरी पर भूकंप का केंद्र था। भूकंप के केंद्र की गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी। इस तरह के भूकंप आम तौर पर सतह पर ज्यादा तबाही मचाते हैं। पाकिस्तान के सरकारी विभाग के मुताबिक कई इमारतों में दरारें आ गई हैं। वहीं जब भूकंप आया तो लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।

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हिमाचल में भी महसूस किए भूकंप के झटके: बता दे शनिवार को हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में तड़के 4.1 तीव्रता का भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि भूकंप के झटके राज्य की राजधानी शिमला से लगभग 130 किलोमीटर दूर रामपुर क्षेत्र में महसूस किए गए।

6 अक्टूबर 2026: बता से कि इससे पहले दिल्ली एनसीआर में आया भूंंकप झटके आए थे। भूंंकप की तीव्रता 5 से कम थी। लेकिन इस बार तीव्रता ज्यादा होने से लोग सहम गएं

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06 नवंबर 2023: दिल्ली-NCR में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। इससे कुछ दिन पहले भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे।

उत्तराखंड में भूगर्भीय सक्रियता को लेकर चिंता: उत्तराखंड में हाल के महीनों में महसूस किए गए भूकंप के झटकों ने हिमालयी क्षेत्र की भूगर्भीय सक्रियता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के लगातार टकराव से जमीन के नीचे ऊर्जा जमा हो रही है। भूगर्भीय अध्ययनों के अनुसार कुमाऊं क्षेत्र में वर्ष 1505 में बड़ा भूकंप आया था। उसका केंद्र रामनगर के आसपास माना जाता है। इसके साक्ष्य रामनगर से ललढांग तक मिले हैं। इसके बाद 1803 और 1833 में भी भूकंप आए लेकिन उनकी तीव्रता 1505 जैसी नहीं थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्र में लंबे समय से जमा हो रही टेक्टोनिक ऊर्जा बड़े भूकंप की आशंका को गंभीर बनाती है।

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सुनील कुमार
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सुनील कुमार (Best E News) हरियाणा की क्षेत्रीय खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनकी प्राथमिकता क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं, जनसमस्याओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाना है। View all posts by सुनील कुमार →

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