
रेवाड़ी (Best E News) हरियाणा के जिला रेवाड़ी के 50 से ज्यादा गांवो की तस्बीर बदलने वाली है। गांवों में कचरे के उचित प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इन गांवों में डंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। कई ग्राम पंचायतों में शैड तैयार कर दिए गए हैं। इसके लिए 2 करोड़ की लागत खर्च होगी। इतना ही नहीं कचरे से जैविक खाद बनाई जाएगी जिससे पंचायतों की आय में बढोतरी होगी।
बता दे कि डंपिंग स्टेशनों पर कचरे को व्यवस्थित तरीके से रखने के लिए शेड बनाए जाएंगे। साथ ही, कचरे को इधर-उधर फैलने से रोकने के लिए स्टेशन के चारों तरफ दीवार का निर्माण भी किया जाएगा।सरकर का मकसद इससे गांवों में जगह-जगह कचरा जमा होने की समस्या पर अंकुश लगाना है तथा कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। गैर-पुनर्चक्रण योग्य कचरे को लैंडफिल व ऊर्जा उत्पाद में उपयोग करने के साथ ही इसे पीडब्लूडी विभाग को ग्राम पंचायत द्वारा बेचा जाएगा।
हर स्टेशन पर खर्च होंगे 3.95 लाख रुपये: बता दें कि संबंधित विभाग की ओर से करीब दो करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। प्रत्येक डंपिंग स्टेशन के निर्माण पर 3.95 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इन स्टेशनों पर गांवों से निकलने वाले कचरे को एकत्रित करने के साथ गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग किया जाएगा।
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फिलहाल खंड स्तर पर टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से गांवों से कचरा उठाने का काम किया जा रहा है। लेकिन, इस कचरे को गांव के बाहर खाली जगह पर डाल दिया जाता है। इससे स्वच्छता की बजाय गंदगी फैल रही है। डंपिंग स्टेशन बनने के बाद गांवों से एकत्रित कचरे को निर्धारित स्थान पर लाकर अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जा सकेगा। इससे कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और जैविक कचरे से खाद तैयार करने के साथ पुनर्चक्रण योग्य सामग्री का दोबारा उपयोग भी संभव हो सकेगा।
कचरे से तैयार की जाएगी जैविक खाद: गीले कचरे से कंपोस्टिंग प्रक्रिया के जरिए जैविक खाद तैयार की जाएगी, जबकि सूखे कचरे में शामिल प्लास्टिक, कांच और धातु जैसी सामग्री को रीसाइकिल इकाइयों तक भेजा जाएगा। इसके अलावा उपयोगी सूखे कचरे का इस्तेमाल सड़क निर्माण में भी किया जाएगा।
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