
हरियाणा: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने के लिए बनाए जा रहे 32 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण तय समय पर पूरा नही हो पाया है। इसी के चलते इस परियोजना की समय सीमा करीब चार महीने आगे बढ़ गई है। सोतई गांव में करीब 900 मीटर जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के कारण एलिवेटेड सड़क का निर्माण अटका हुआ था। अब प्रशासन ने पुलिस की मदद से जमीन पर कब्जा लेकर पिलर बनाने का काम शुरू करवा दिया है।
4,600 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा एक्सप्रेसवे
बता दें इस एक्सप्रेसवे का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से करीब 4,600 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इसकी कुल लंबाई 32 किलोमीटर है, जिसमें करीब नौ किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश और 23 किलोमीटर हरियाणा में पड़ता है। परियोजना के तहत लगभग आठ किलोमीटर सड़क एलिवेटेड बनाई जा रही है।सोतई गांव में किसानों की जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के कारण एलिवेटेड सड़क के पिलर बनाने का काम लंबे समय से रुका हुआ था।
जानिए रूका था काम: सोतई गांव में जमीन अधिग्रहण के चलते फिलहाल काम रूक गया था। अब अब प्रशासन की कार्रवाई के बाद निर्माण एजेंसी ने काम शुरू कर दिया है। पिलर तैयार होने के बाद उनके ऊपर कैप बनाई जाएंगी और फिर लैंटर डालने का काम किया जाएगा। इसी देरी के चलते बहबलपुर, दयालपुर, फफूंडा और पन्हैड़ा खुर्द गांवों की सीमा में भी एलिवेटेड सड़क का निर्माण कार्य प्रभावित रहा है। फिलहाल तटबंध का निर्माण कार्य बंद पड़ा है। परियोजना के शेष कार्य पूरे होने और जमीन से जुड़ी बाधाएं दूर होने के बाद एक्सप्रेसवे को चालू करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
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जानिए किन जिलों को मिलेगा फायदा: ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनने से फरीदाबाद, पलवल, नूंह, सोहना, गुरुग्राम और तावडू क्षेत्र के लोगों को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के कई क्षेत्रों की एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। एक्सप्रेसवे के लिए मोहना गांव के पास यमुना नदी पर पुल बनाया गया है। बाढ़ के दौरान पुल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यहां तटबंध बनाने का काम भी किया जा रहा है। फिलहाल तटबंध का निर्माण कार्य बंद पड़ा है। परियोजना के शेष कार्य पूरे होने और जमीन से जुड़ी बाधाएं दूर होने के बाद एक्सप्रेसवे को चालू करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
