गुरूवार, 5 नवम्बर 2026

Delhi News: AQI खतरनाक, दिल्लीवासियों की सांसें मुश्किल में, बीजिंग के अनुभव से मिले समाधान

Written by: सुनील कुमार

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Delhi News: दिल्ली-NCR में हवा बहुत खराब है। मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। राजधानी काले धुएं और धूल से ढकी हुई है। AQI मीटर 'खतरनाक लेवल' पर है। हर…


Delhi News: AQI खतरनाक, दिल्लीवासियों की सांसें मुश्किल में, बीजिंग के अनुभव से मिले समाधान
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Delhi News: दिल्ली-NCR में हवा बहुत खराब है। मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। राजधानी काले धुएं और धूल से ढकी हुई है। AQI मीटर ‘खतरनाक लेवल’ पर है। हर घर में खांसी और आंखों में जलन आम बात है। अब हर कोई सोच रहा है कि अगर चीन की राजधानी बीजिंग कभी दिल्ली से ज़्यादा प्रदूषित थी, तो चीन ने बीजिंग में स्मॉग और प्रदूषण को कैसे कम किया, और क्या दिल्ली को भी बीजिंग का उदाहरण अपनाना चाहिए?

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चीन की राजधानी बीजिंग में वायु प्रदूषण 2007 में शुरू हुआ, और 2011 तक यह दिल्ली से भी ज़्यादा खराब हो गया था। पूरे शहर में भूरे रंग की धुंध छा गई थी। PM2.5 का लेवल खतरनाक रूप से ज़्यादा था। 2013 में बीजिंग का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 755 तक पहुंच गया था। 2013 को चीन का सबसे प्रदूषित साल माना गया, और बीजिंग को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया।

बीजिंग का वायु प्रदूषण दुनिया भर के मीडिया में लगातार चर्चा का विषय बना रहा। विदेशी कंपनियों ने निवेश करने में हिचकिचाहट दिखानी शुरू कर दी, और अमीर चीनी दूसरे देशों में भागने लगे। चीन अपनी वायु प्रदूषण की समस्या के कारण विश्व स्तर पर बदनाम हो गया था। चीन ने इसे गंभीरता से लिया और इस पर कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप बीजिंग अब उतना प्रदूषित नहीं रहा।

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दस साल के लगातार प्रयासों का नतीजा

भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने हाल ही में कहा कि यह अंतर पिछले दस सालों में चीन के लगातार प्रयासों का नतीजा है। उनकी पोस्ट में लिखा था, “हम एक छोटी सी सीरीज़ शेयर करेंगे जिसमें बताया जाएगा कि चीन ने वायु प्रदूषण से कैसे निपटा।”

यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गई। कई यूज़र्स ने इस सुझाव का स्वागत किया, और दिल्ली की खराब हवा की क्वालिटी पर चिंता जताई।

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चीन साफ ​​हवा के लिए क्या कर रहा था?

चीनी सरकार ने 2013 में पांच साल की वायु प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण योजना शुरू की।
इसने बीजिंग-तियानजिन-हेबेई क्षेत्र में PM2.5 के स्तर को कम करने के लिए सख्त लक्ष्य तय किए।
सरकार ने उद्योगों, ईंधन नियमों और शहरी नियोजन पर कड़े कानून लागू किए। 2018 से शुरू हुए ब्लू स्काई प्रोटेक्शन कैंपेन ने इन नियमों को और भी सख्त बना दिया है।

बीजिंग बड़े हरे-भरे इलाकों, जंगलों और पार्कों से घिरा हुआ है। इससे हवा की क्वालिटी में सुधार हुआ है और धूल भरी आंधियां कम हुई हैं।

बीजिंग में लागू किए गए कौन से नियम दिल्ली में तुरंत लागू किए जा सकते हैं? सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के पूर्व एडिशनल डायरेक्टर डॉ. दीपांकर साहा कहते हैं कि बीजिंग और दिल्ली दो अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्र हैं। दिल्ली और बीजिंग में मौसम, सरकारी नीतियां, लोगों की आदतें और प्रशासनिक सिस्टम पूरी तरह से अलग हैं। भारत एक लोकतंत्र है, जबकि चीन एक तानाशाही देश है। वे शहर में किसी भी अतिरिक्त गाड़ी या लोगों को आने से रोक सकते हैं। भारत में यह संभव नहीं है।

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सुनील कुमार
About the Author सुनील कुमार

सुनील कुमार (Best E News) हरियाणा की क्षेत्रीय खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनकी प्राथमिकता क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं, जनसमस्याओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाना है। View all posts by सुनील कुमार →

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