मंगलवार, 3 नवम्बर 2026

Breaking News: यूरिया संकट के बीच दही बना किसानों के लिए रामबाण, जानिए कैसे

Written by: PK Chauhan

Published:

 Breaking News: देश के कई राज्यों में यूरिया की किल्लत के चलते किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। खाद के लिए घंटों कतारों में लगने के बाद भी कई जगह…


 Breaking News: देश के कई राज्यों में यूरिया की किल्लत के चलते किसान गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। खाद के लिए घंटों कतारों में लगने के बाद भी कई जगह किसानों को एक से दो बोरी यूरिया ही मिल पा रही है। इसी बीच उत्तर भारत के कुछ इलाकों में किसानों द्वारा अपनाया गया एक पारंपरिक जैविक प्रयोग चर्चा में है, जिसमें दही का उपयोग उर्वरक के विकल्प के रूप में किया जा रहा है।

Advertisement

किसानों के अनुभव के अनुसार, दो किलो दही का प्रयोग 25 किलो यूरिया के समान प्रभाव दिखा रहा है। उत्तर बिहार, दिल्ली और गुजरात के कुछ क्षेत्रों में बीते कई वर्षों से किसान इस पद्धति को अपना रहे हैं। किसानों का दावा है कि इससे खेती की लागत में भारी कमी आई है और उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और गुजरात के कुछ कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा इस प्रयोग पर अध्ययन भी किया गया है। Breaking News

दही आधारित घोल के उपयोग से न केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हुई है, बल्कि कीटनाशकों और सिंचाई खर्च में भी कमी आई है। किसानों के अनुसार, दही के छिड़काव के बाद 15 दिनों तक सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे पानी और बिजली दोनों की बचत होती है। यह घोल फसलों को नाइट्रोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ मिट्टी में सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या बढ़ाता है।

Advertisement

ये भी पढ़ें:Breaking News : रेलवे का बड़ा फैसला : अब दूसरे विभागों में नहीं जा सकेंगे कर्मचारी

यह जैविक तरीका गेहूं, धान, मक्का, गन्ना, सब्जियों, आम, केला और लीची सहित लगभग सभी फसलों में उपयोग किया जा रहा है। बागवानी फसलों में फूल आने से पहले इसके प्रयोग से फल का आकार और गुणवत्ता बेहतर होने का दावा किया गया है। कुछ किसान इसमें नीम तेल या मेथी का पेस्ट मिलाकर कीटनाशक के रूप में भी प्रयोग कर रहे हैं, जिससे फंगस और कीटों का प्रकोप कम होता है।

मुजफ्फरपुर सहित उत्तर बिहार के कई किसानों को इस नवाचार के लिए सम्मानित भी किया जा चुका है। हालांकि कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नए प्रयोग को अपनाने से पहले स्थानीय कृषि अधिकारी या वैज्ञानिक की सलाह लेना जरूरी है, ताकि फसल और मिट्टी को नुकसान से बचाया जा सके।

ये भी पढ़ें:हरियाणा पुलिस में हजारों पदों पर भर्ती की तैयारी साइबर अपराधियों पर भी कसेगा शिकंजा

PK Chauhan
About the Author PK Chauhan

मै पीके चौहान पिछले 6 साल में पत्रकारिता में कार्यरत हूं। मेरे द्वारा राजनीति, क्राइम व मंनोरजन की खबरे Best E News पर अपडेट की जाती है। View all posts by PK Chauhan →

खबरें और भी

WhatsApp