
नई दिल्ली। भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी कानून विशेषज्ञ नवनेथम नवी पिल्लई को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने 9 अक्टूबर को उनके नाम की घोषणा की। उन्हें यह सम्मान शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए दिया गया है। 85 वर्षीय नवी पिल्लई ने युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार के मामलों में दोषियों को जवाबदेह ठहराने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कौन हैं नवी पिल्लई?
नवी पिल्लई का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ था। उनके परिवार की जड़ें भारत से जुड़ी हैं। रंगभेद के दौर में पली-बढ़ीं पिल्लई ने कानून की पढ़ाई के बाद वकील के रूप में अपना करियर शुरू किया। उन्होंने रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं का बचाव किया और बाद में दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय की पहली गैर-श्वेत महिला न्यायाधीश बनीं।
रवांडा न्यायाधिकरण की अध्यक्ष भी रहीं
नवी पिल्लई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह 1999 से 2003 तक रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण की न्यायाधीश और अध्यक्ष रहीं। इस दौरान यौन हिंसा और बलात्कार को मानवता के खिलाफ अपराध तथा नरसंहार से जुड़े अपराधों के रूप में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में भी 2008 से 2014 तक काम किया।
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अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के लिए योगदान
नवी पिल्लई ने 2021 से 2025 तक कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्रों पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र जांच आयोग की अध्यक्षता की। वह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में म्यांमार के खिलाफ रोहिंग्या नरसंहार के आरोपों से जुड़े मामले में एड हॉक न्यायाधीश भी हैं। नोबेल समिति के अनुसार, उनका कार्य अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने और युद्ध अपराधों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण रहा है।
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नोबेल समिति ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और न्याय व्यवस्था के जरिए संघर्षों को बिना हिंसा के सुलझाने तथा पीड़ितों को न्याय दिलाने का प्रयास शांतिपूर्ण दुनिया के लिए जरूरी है। नवी पिल्लई का यह सम्मान मानवाधिकारों, न्याय और अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को मान्यता देता है।
भारत से क्या है रिश्ता: नवी भारतीय मूल की तमिल परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके दादा गन्ना किसान थे। गौर करने वाली बात यह है कि उनके पूर्वज भारत से गिरमिटिया मजदूर के रूप में दक्षिण अफ्रीका गए थे। भारत से गहरी भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव के चलते उन्होंने अपनी पारंपरिक तमिल संस्कृति, संस्कारों और मूल्यों को संजोए रखा, जो उनके संघर्षशील और न्यायप्रिय जीवन में स्पष्ट रूप से झलकता है।
अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय की लड़ाई के लिए अपनी पूरी जिंदगी समर्पित करने वाली जानी-मानी दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवनीतम नवी पिल्लई को 2026 का प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने उन्हें यह सम्मान शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके असाधारण प्रयासों के लिए दिया है।
वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दक्षिण अफ्रीका की मानवाधिकार वकील और न्यायाधीश नवनेथम “नवी” पिल्लई (Navanethem “Navi” Pillay) को देने की घोषणा की गई है।
- • घोषणा की तारीख: 9 अक्टूबर 2026
- • स्थान: ओस्लो, नॉर्वे (नॉर्वेजियन नोबेल समिति द्वारा)
- • पुरस्कार राशि: 12.0 मिलियन स्वीडिश क्रोन (SEK)
शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने, तथा युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार के मामलों को न्याय के कटघरे में लाने के उनके ऐतिहासिक प्रयासों के लिए
जानिए कितनी पढी लिखी है नवी पिल्लई?
बात अब शिक्षा की करें तो नवी ने स्थानीय भारतीय समुदाय के लोगों और चंदे के सहयोग से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ नटाल से 1963 में कला स्नातक (BA) और 1965 में कानून की डिग्री (LLB) हासिल की।
बता दें कि नवी पिल्लई का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के नटाल प्रांत (जिसे अब क्वाजुलु-नटाल के नाम से जाना जाता है) के डरबन शहर के एक गरीब और साधारण परिवार में हुआ था।खास बात है कि नवी भारतीय तमिल मूल की हैं और उनके पिता एक बस ड्राइवर थे। उनका शुरुआती जीवन दक्षिण अफ्रीका के बेहद कड़े और क्रूर रंगभेद शासन के साये में बीता।
