
Safety First: सुरक्षा नियमों की अनदेखी की चलते रेवाड़ी बावल धारूहेड़ा भिवाड़ी में आगजनी की वारदातें नही थम रही है। आलम यहां तक है कंपनियों में सुरक्षा नियमों की दरकरार किया जाता है। श्रमिको की जान हथेली पर लेकर काम करना पड रहा हैं। बेरोजकारी के श्रमिक काम करने को मजबूर है। इस साल हुए हादसे मे कई श्रमिको की जान चली गई। ऐसे में कंपनियां उचित मुआवजा देने की बजाय टरका देते है। प्रशासन की मिली भगत के चलते कंपनी प्रबंधन पर लापरवाही का लेकर कोई कार्रवाई नही होती है। आग बुझते ही फायल के बंद कर दिया जाता हैं।
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, कार्यस्थल से संबंधित दुर्घटनाएं और बीमारियां हर साल लगभग 29.3 लाख लोगों की जान लेती हैं। World Risk Poll 2024 में पाया गया कि दुनिया भर में लगभग हर पांचवें कर्मचारी ने बताया कि पिछले दो वर्षों में काम के दौरान उन्हें नुकसान हुआ। लागत केवल चिकित्सा बिलों और मुआवजे के दावों से कहीं आगे जाती है। उत्पादकता की हानि, कर्मचारियों का आना-जाना और प्रतिष्ठा को नुकसान छिपी हुई लागतें हैं, जो अक्सर प्रत्यक्ष खर्चों से कई गुना अधिक होती हैं।
उद्योग सुरक्षा नियम वे कानूनी और परिचालन आवश्यकताएं हैं जिनका हर व्यवसाय को पालन करना होता है ताकि कर्मचारियों को चोट, बीमारी और मृत्यु से बचाया जा सके। ये लिखित नीतियों और जोखिम मूल्यांकन से लेकर पीपीई, मशीन सुरक्षा और आपातकालीन योजना तक सब कुछ शामिल करते हैं।
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भारत के कारखाना अधिनियम 1948, खतरनाक रसायन के निर्माण, भंडारण और आयात नियम 1989 (MSIHC Rules), पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 तथा GHS के अनुरूप रासायनिक वर्गीकरण और लेबलिंग की आवश्यकताओं को दर्शाते हैं, जिनकी निगरानी भारत में DGFASLI (कारखाना सलाह सेवा और श्रम संस्थान महानिदेशालय) द्वारा की जाती है।
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जानिए क्या है श्रमिकों के सुरक्षा नियम
पर्सनल सेफ्टी आपकी ज़िम्मेदारी है: बता दें कि वर्कप्लेस को सुरक्षित बनाने में हर किसी की भूमिका होती है, एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट से लेकर जो नए डिलीवर हुए ऑफिस सप्लाई के बॉक्स को तुरंत खोलता है, वेयरहाउस फोरमैन तक जो यह पक्का करता है कि लाइन पर हर व्यक्ति को ब्रेक मिले। जब आप अपनी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी खुद लेते हैं, तो यह सभी कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित जगह बनाता है।
कपड़ों से लेकर जूतों तक, सही कपड़े पहनें: काम करने वाले श्रमिकों हाथ-पैर ढके रहना, लटकते हुए गहने या टाई से बचना, और बंद पंजे वाले जूते पहनना, काम की जगह पर होने वाली आम चोटों और दुर्घटनाओं को कम करने में बहुत मदद कर सकता है। जब और जहाँ ज़रूरी हो, हमेशा पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) पहनें , और इस्तेमाल करने से पहले और बाद में नुकसान की जाँच करें, ताकि इसे तुरंत रिपेयर या बदला जा सके।
काम करने की जगह को साफ़-सुथरा रखें: हर शिफ्ट की शुरुआत और आखिर में, कचरा हटा दें, तार और केबल उठा लें, और ऑफिस का सामान रख दें। अपना काम पूरा करने के लिए ज़रूरी सामान इकट्ठा कर लें। इससे चीज़ें खोने से बचेंगी और आपको बेवजह झुकने या खिंचने से भी बचेंगी, ताकि आप उन चीज़ों तक न पहुँच पाएँ जो गलत जगह पर हों या पहुँच से बाहर हों।
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नियमों का पालन करें: काम में कोताही न बरतें या बेवजह का रिस्क न लें। काम की जगह पर सुरक्षा के नियम अक्सर खतरे और रिस्क के असेसमेंट के जवाब में बनाए जाते हैं । वे असल में इस तरह से बनाए जाते हैं कि किसी कर्मचारी को दिए गए काम करते समय चोट लगने का खतरा कम से कम हो।
ले एक्सीडेंट या सेफ्टी से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्ट करें: हमेशा अपने सुपरवाइज़र को घटनाओं की तुरंत रिपोर्ट करें ताकि सही कदम उठाए जा सकें। इनमें घायल कर्मचारी की देखभाल करना, चोट लगने की वजह से हुई प्रॉब्लम को ठीक करना, या रेगुलेटरी, स्टेट या फ़ेडरल रिपोर्टिंग कंप्लायंस पक्का करना शामिल हो सकता है ।
इमरजेंसी प्रोसीजर को जानें और फॉलो करें: इमरजेंसी को सुरक्षित और अच्छे से मैनेज करने के लिए, यह ज़रूरी है कि सभी कर्मचारियों को इमरजेंसी के तरीकों की ट्रेनिंग दी जाए और वे उनका पालन करें। इससे सेफ्टी कोऑर्डिनेटर और इमरजेंसी सर्विस को स्थिति को संभालने और उसे कंट्रोल में लाने का सबसे अच्छा तरीका तय करने में मदद मिलती है।
चोट से बचने के लिए सावधानी से काम करें: बॉक्स उठाते समय या चीज़ों तक पहुँचने के लिए स्ट्रेचिंग करते समय खराब टेक्निक की वजह से होने वाली मस्कुलोस्केलेटल प्रॉब्लम वर्कप्लेस पर चोट लगने का एक आम कारण है। अगर आपको नहीं पता कि काम पर सबसे अच्छा कैसे उठाना, झुकना या स्ट्रेच करना है, तो अपने सुपरवाइज़र या कंपनी के सेफ्टी ऑफिसर से पूछें।
ऐसे औजार या मशीनरी न चलाएं जिनके लिए आपको ट्रेनिंग नहीं हो: हालांकि कुछ टूल्स या इक्विपमेंट काफी आसान लग सकते हैं, लेकिन जब तक आपको उन्हें ठीक से हैंडल करने की ट्रेनिंग न मिली हो, तब तक उनका इस्तेमाल करने से बचना हमेशा अच्छा होता है। यह आपकी और आपके आस-पास के लोगों की सेफ्टी के लिए है।
काम पर ड्रग्स और शराब से बचें: ड्रग्स और शराब न सिर्फ़ आपकी मोटर स्किल्स पर असर डाल सकते हैं, बल्कि वे आपके फ़ैसले लेने और बातचीत करने की क्षमता को भी कमज़ोर कर सकते हैं। यहाँ तक कि डॉक्टर की लिखी दवाएँ भी मशीनरी और औज़ारों को सुरक्षित रूप से संभालने की आपकी क्षमता पर गंभीर असर डाल सकती हैं।
सही समय पर ब्रेक लें: अच्छी तरह आराम करने से कर्मचारियों को फोकस बनाए रखने और हालात के हिसाब से सुरक्षा की जानकारी रखने में मदद मिलती है , जो काम की जगह की सुरक्षा में मदद करता है। कुछ जगहों पर, कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से काम के ब्रेक तय किए जा सकते हैं; दूसरी जगहों पर, कर्मचारियों को आपस में ब्रेक तय करने होते हैं।
वर्कप्लेस सेफ्टी के ये 10 नियम लगभग हर वर्कप्लेस पर लागू किए जा सकते हैं। एक सुरक्षित वर्किंग माहौल में, अचानक कर्मचारियों की गैरहाजिरी से होने वाली स्टाफिंग की दिक्कतों के बिना काम की क्वालिटी और क्वांटिटी बनाए रखी जा सकती है। जब कर्मचारी और मैनेजमेंट मिलकर सेफ्टी को ज़्यादा से ज़्यादा करने के लिए काम करते हैं, तो इससे सभी को फायदा होता है।
रेवाड़ी में एक साल में आगजनी की घटनाए
- अक्टूबर 2026: धारूहेड़ा के गांव राजपुरा आलमगीरपुर के पास शनिवार को चलते ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरी धान की पराली में आग
अक्टूबर 2026: बावल औद्योगिक क्षेत्र स्थित मोबाइल फोन बनाने वाली DBG कंपनी के स्क्रैप यार्ड में भीषण आग लगी - • सितंबर 2026: बावल के सेक्टर-3 स्थित ‘स्मार्ट स्पेस सोल्यूशन’ और ‘गुरु कृपा फुटवेयर’ कंपनी में आग लगी।
- • जुलाई 2026: रेवाड़ी के गोकलगढ़ टी-पॉइंट के पास एक प्लाईवुड (वुड स्टूडियो) गोदाम में भीषण आग लगी, जिसे बुझाने के लिए 10 दमकल गाड़ियां बुलाई गईं।
- • मई 2026
- बावल औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर-6 की एक केमिकल फैक्ट्री में आग लगने से 4 लोगों की मौत?
- जेएलएस (JLS) कंपनी में आग लगने के बाद पूरी बिल्डिंग ढह गई और एफआईआर दर्ज हुई।
- UTL सोलर कंपनी में भीषण आग लगी।
भिवाड़ी में आगजनी की वारदातें
- खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र (25 अक्टूबर 2026): रविवार सुबह खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट नंबर F-621 पर स्थित एक प्लास्टिक आइटम बनाने वाली मल्टी स्पेशलिटी कंपनी में भीषण आग लग गई। प्लास्टिक और केमिकल के कारण आग इतनी तेजी से फैली कि आधे घंटे के भीतर पूरा प्लांट जलकर राख हो गया।
- सांथलका पैकेजिंग फैक्ट्री (21 अक्टूबर 2026): भिवाड़ी फेज-3 थाना क्षेत्र के सांथलका में डीए पैकेजिंग कंपनी (गत्ते के डिब्बे बनाने वाली फैक्ट्री) में शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई। मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।
- चौपानकी औद्योगिक क्षेत्र (सितंबर 2026): चौपानकी औद्योगिक क्षेत्र स्थित ‘सीआरडी इंडस्ट्रीज’ नामक केमिकल निर्माण कंपनी में भीषण आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया था।
- खुशखेड़ा केमिकल फैक्ट्री हादसा (16 फरवरी 2026): खुशखेड़ा के एक केमिकल प्लांट में हुए एक जोरदार धमाके और आगजनी की घटना में 7 मजदूरों की जलकर मौत हो गई थी और कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे ।
रेवाड़ी में एक साल में आगजनी की घटनाए
- अक्टूबर 2026: धारूहेड़ा के गांव राजपुरा आलमगीरपुर के पास शनिवार को चलते ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरी धान की पराली में आग
अक्टूबर 2026: बावल औद्योगिक क्षेत्र स्थित मोबाइल फोन बनाने वाली DBG कंपनी के स्क्रैप यार्ड में भीषण आग लगी - • सितंबर 2026: बावल के सेक्टर-3 स्थित ‘स्मार्ट स्पेस सोल्यूशन’ और ‘गुरु कृपा फुटवेयर’ कंपनी में आग लगी।
- • जुलाई 2026: रेवाड़ी के गोकलगढ़ टी-पॉइंट के पास एक प्लाईवुड (वुड स्टूडियो) गोदाम में भीषण आग लगी, जिसे बुझाने के लिए 10 दमकल गाड़ियां बुलाई गईं।
• मई 2026
- बावल औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर-6 की एक केमिकल फैक्ट्री में आग लगने से 4 लोगों की मौत?
- जेएलएस (JLS) कंपनी में आग लगने के बाद पूरी बिल्डिंग ढह गई और एफआईआर दर्ज हुई।
- UTL सोलर कंपनी में भीषण आग लगी।
