बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

रेवाड़ी के किसानों के लिए बड़ा अलर्ट! बाजरा और कपास की फसल में लापरवाही पड़ सकती है भारी, जानें क्या करें

Written by: सुनील कुमार

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रेवाड़ी के किसानों के लिए बड़ा अलर्ट, रेवाड़ी जिले में खरीफ सीजन की फसलें अब तेजी से बढ़ने लगी हैं। हाल ही में हुई बारिश से खेतों में नमी बढ़ी है, जिससे…


रेवाड़ी के किसानों के लिए बड़ा अलर्ट
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रेवाड़ी के किसानों के लिए बड़ा अलर्ट, रेवाड़ी जिले में खरीफ सीजन की फसलें अब तेजी से बढ़ने लगी हैं। हाल ही में हुई बारिश से खेतों में नमी बढ़ी है, जिससे बाजरा और कपास की फसलों को अच्छा लाभ मिला है। हालांकि, मौसम में आई यह अनुकूलता अपने साथ नई चुनौतियां भी लेकर आई है।

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खेतों में खरपतवार तेजी से फैल रहे हैं और कई तरह के कीट भी सक्रिय होने लगे हैं। ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि समय रहते फसलों की निगरानी और उचित प्रबंधन करें, ताकि उत्पादन पर किसी तरह का नकारात्मक असर न पड़े।

बारिश से बढ़ी फसलों की रफ्तार, लेकिन खतरा भी हुआ दोगुना

जुलाई में हुई अच्छी बारिश ने खेतों में पर्याप्त नमी पहुंचाई है, जिससे खरीफ फसलों की बढ़वार तेज हो गई है। लेकिन यही मौसम खरपतवार और कीटों के तेजी से फैलने के लिए भी अनुकूल माना जाता है। यदि किसान शुरुआती चरण में ही इन पर नियंत्रण नहीं करते हैं, तो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

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अगेती बाजरा की फसल में अभी करें निराई-गुड़ाई

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगेती बाजरा की फसल में इस समय निराई-गुड़ाई करना सबसे उपयुक्त रहेगा। खेतों में उगे खरपतवार पौधों से पानी और पोषक तत्व छीन लेते हैं, जिससे फसल का विकास प्रभावित होता है। समय पर खरपतवार हटाने से पौधों की बढ़वार बेहतर होती है और अच्छी पैदावार मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

कपास की फसल में बढ़ सकता है कीटों का प्रकोप

कपास की फसल इस समय संवेदनशील अवस्था में पहुंच रही है। जुलाई के दौरान गुलाबी सुंडी, सफेद मक्खी और जड़ गलन जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में किसानों को नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करना चाहिए और पौधों में किसी भी प्रकार के बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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बिना सलाह के दवा का प्रयोग करने से बचें

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रकार के कीटनाशक, फफूंदनाशक या खरपतवारनाशी का प्रयोग बिना कृषि विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए। आवश्यकता के अनुसार सही दवा और सही मात्रा का उपयोग करने से फसल सुरक्षित रहती है और अनावश्यक खर्च से भी बचा जा सकता है।

रेवाड़ी में खरीफ फसलों का रकबा

  • बाजरा: 1,05,585 एकड़
  • कपास: 6,820 एकड़
  • मूंग: 121 एकड़
  • तिल: 10 एकड़
  • मूंगफली: 128 एकड़
  • पशुचारा: 2,768 एकड़

कृषि विभाग ने किसानों को दी यह सलाह

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे नियमित रूप से अपने खेतों का निरीक्षण करते रहें। यदि फसल में किसी प्रकार के रोग, कीट या खरपतवार दिखाई दें तो तुरंत कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करें। समय पर सही प्रबंधन अपनाने से फसल सुरक्षित रहती है, लागत कम होती है और बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

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सुनील कुमार
About the Author सुनील कुमार

सुनील कुमार (Best E News) हरियाणा की क्षेत्रीय खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनकी प्राथमिकता क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं, जनसमस्याओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाना है। View all posts by सुनील कुमार →

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