गुरूवार, 5 नवम्बर 2026

Haryana News: हरियाणा में पर्यावरण बचाने की बड़ी कामयाबी, पराली जलाने के मामले में 72% गिरावट

Written by: सुनील कुमार

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Haryana News: हरियाणा में इस साल पराली जलाने के मामलों में भारी कमी देखी गई है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के 20 नवंबर तक के आंकड़ों के अनुसार इस बार पराली…


Haryana News: हरियाणा में पर्यावरण बचाने की बड़ी कामयाबी, पराली जलाने के मामले में 72% गिरावट
Haryana News: हरियाणा में पर्यावरण बचाने की बड़ी कामयाबी, पराली जलाने के मामले में 72% गिरावट
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Haryana News: हरियाणा में इस साल पराली जलाने के मामलों में भारी कमी देखी गई है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के 20 नवंबर तक के आंकड़ों के अनुसार इस बार पराली जलाने के मुकाबले गैर कृषि भूमि और कचरे में आग लगने के मामले अधिक सामने आए हैं। खास बात यह है कि 2020 की तुलना में पराली जलाने के मामले 92 प्रतिशत और पिछले साल के मुकाबले 72 प्रतिशत तक कम हुए हैं।

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एक्टिव फायर लोकेशन के आंकड़े

20 नवंबर तक कुल 592 एक्टिव फायर लोकेशन (एएफएल) मामले चिन्हित किए गए। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की मदद से विभाग ने 590 मामलों की जांच की। जांच में पता चला कि इनमें से केवल 230 जगहों पर पराली जल रही थी। बाकी 356 मामले गैर कृषि भूमि या कचरे में आग के थे जबकि चार मामले एक ही स्थान के दोहरे रिकॉर्ड थे।

जिलों में आग के मामले

जिलों में आग के मामलों की बात करें तो अंबाला में पांच मामले पंजाब की सीमा से संबंधित थे जो पुष्ट नहीं हुए। हिसार में चार आग के मामले मिले। फरीदाबाद में चार कचरा जलाने के मामले पाए गए और वहां संबंधित लोगों पर 25-25 हजार का जुर्माना लगाया गया। फतेहाबाद में कुछ एक्सीडेंटल मामले सामने आए और कई मामले चिन्हित नहीं हो पाए। कैथल, जींद और रोहतक जिलों में ज्यादातर आग गैर कृषि भूमि पर लगी।

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प्रदूषण पर असर

पिछले सालों के मुकाबले इस बार पराली जलाने के मामलों में साफ गिरावट आई है। 2020 में इसी अवधि में 3884 मामले थे जो 2021 में बढ़कर 6464 और 2022 में घटकर 3491 रह गए। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक रणबीर राठी के मुताबिक पराली जलाने से कुल प्रदूषण में करीब 16 से 20 प्रतिशत तक योगदान होता है। इसलिए कम पराली जलने से प्रदूषण में कमी आई है।

पराली जलाने के मामलों में कमी प्रदेश के लिए अच्छी खबर है। इससे न केवल प्रदूषण कम हुआ है बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है। अब यह जरूरी हो गया है कि गैर कृषि भूमि और कचरे में आग लगने के मामलों पर भी कड़ाई से नजर रखी जाए ताकि प्रदूषण को और घटाया जा सके।

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सुनील कुमार
About the Author सुनील कुमार

सुनील कुमार (Best E News) हरियाणा की क्षेत्रीय खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनकी प्राथमिकता क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं, जनसमस्याओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाना है। View all posts by सुनील कुमार →

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