रविवार, 1 नवम्बर 2026

Harish Rana Passive Euthanasia Case: हरिश राणा AIIMS दिल्ली में हुए शिफ्ट

Written by: PK Chauhan

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Harish Rana Passive Euthanasia Case : सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के मामले में 'पैसिव इच्छामृत्यु' (passive euthanasia) की अनुमति दी, क्योंकि उनकी स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं थी। सुप्रीम…


Harish Rana Passive Euthanasia Case: हरिश राणा AIIMS दिल्ली में हुए शिफ्ट
Harish Rana Passive Euthanasia Case: हरिश राणा AIIMS दिल्ली में हुए शिफ्ट
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Harish Rana Passive Euthanasia Case : सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के मामले में ‘पैसिव इच्छामृत्यु’ (passive euthanasia) की अनुमति दी, क्योंकि उनकी स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हरीश राणा को शनिवार को एम्स दिल्ली में शिफ्ट किया गया है। यह भारत में पहली बार किसी व्यक्ति के लिए इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू हुई है।

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13 साल से बीमारी से झूज रहे राणा

बता दे कि Harish Rana  पिछले 13 साल से स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हरीश को उनके घर से एम्स दिल्ली के पैलिएटिव केयर विभाग में भर्ती किया गया। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी देखभाल कर रही है। इतना ही नहीं लाइफ सपोर्ट हटाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

एम्स ने बनाई एक्सपर्ट कमिटी

पैलिएटिव केयर में उनका दर्द प्रबंधन (पेन मैनेजमेंट) किया जाएगा। कोई नया लाइफ सपोर्ट नहीं दिया जाएगा। धीरे-धीरे फीडिंग ट्यूब और अन्य सपोर्ट हटाए जाएंगे, ताकि प्राकृतिक मौत हो सके। एम्स ने एक एक्सपर्ट कमिटी बनाई है, जो इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के मामले में ‘पैसिव इच्छामृत्यु’ (passive euthanasia) की अनुमति दी, क्योंकि उनकी स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं थी।

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पिता अशोक राणा का छलका दर्द

हरीश के पिता अशोक राणा ने कहा कि एम्स में विशेषज्ञों की देखरेख में लाइफ सपोर्ट हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वह बिल्कुल टूट चुका है। हरीश को सांस, खाना और मल-त्याग के लिए नलियां लगी हैं। पिता का कहना है राहत सिर्फ इतनी है कि उसे सम्मानजनक मौत मिलेगी। वे बेटे की लंबी बीमार से बडे परेशान थे।

क्यों पडी जरूरत इसकी

​बता दे कि हरीश राणा गंभीर रूप से बीमार थे और उन्हें लाइफ सपोर्ट पर रखा गया था, जिसकी वजह से उनके परिवार ने इच्छामृत्यु की गुहार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद, जिसमें रिकवरी की उम्मीद न के बराबर बताई गई थी, इच्छामृत्यु (पैसिव) की अनुमति दी।

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इस दिन सुनाया सुप्रीम कोर्ट ने फैसला

बता दे परिजन हरीश राण की बीमारी से बडे परेशान हैं करीब 13 साल वह बीमारी से झूज रहा है। बता दे कि 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन) ने हरीश के माता-पिता की याचिका पर ये फैसला सुनाया था। कोर्ट ने क्लिनिकली असिस्टेड न्यूट्रिशन एंड हाइड्रेशन (CANH) को मेडिकल ट्रीटमेंट माना और इसे हटाने की इजाजत दी। उसके बाद ही उसे शनिवार का दिल्ली में एम्स में भर्ती किया गया है।

 

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About the Author PK Chauhan

मै पीके चौहान पिछले 6 साल में पत्रकारिता में कार्यरत हूं। मेरे द्वारा राजनीति, क्राइम व मंनोरजन की खबरे Best E News पर अपडेट की जाती है। View all posts by PK Chauhan →

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