
धारूहेड़ा: यूरो इंटरनेशनल स्कूल में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के दिशा-निर्देशों के तहत एक दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का विषय था “सीखने के परिणाम एवं शिक्षण शास्त्र” (Learning Outcomes and Pedagogy), जो विद्यार्थियों के समग्र विकास और प्रभावी शिक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।EURO School Dharuhera
कार्यशाला का संचालन अनुभवी शिक्षाविद् सुश्री अनुपमा शर्मा और श्री महेन्द्र कुमार ने किया। दोनों विशेषज्ञों ने शिक्षकों को यह समझाया कि सीखने के परिणाम (Learning Outcomes) विद्यार्थियों की उस क्षमता को दर्शाते हैं, जो वे किसी पाठ्यक्रम या गतिविधि को पूरा करने के बाद अर्जित करते हैं—जैसे कि वे क्या जान पाएंगे, कर पाएंगे या किस बात को महत्व देंगे।EURO School Dharuhera
स्कूल की अकैडमिक डीन श्रीमती मीनू दूबे और प्राचार्या श्रीमती कल्पना यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ते हैं, जिससे वे विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित कर सकते हैं।
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शिक्षण शास्त्र (Pedagogy) यह बताता है कि शिक्षक किस प्रकार विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को समझते हैं और किस तरह विभिन्न शिक्षण तकनीकों व कक्षा प्रबंधन के माध्यम से ज्ञान को प्रभावी रूप से संप्रेषित करते हैं। प्रशिक्षकों ने कक्षा शिक्षण में इन दोनों पहलुओं को जोड़ने के व्यावहारिक तरीकों पर विस्तार से चर्चा की।
स्कूल की अकैडमिक डीन श्रीमती मीनू दूबे और प्राचार्या श्रीमती कल्पना यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ते हैं, जिससे वे विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित कर सकते हैं।
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कार्यशाला में सभी शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। सत्र के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्राचार्या ने सभी शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि “शिक्षक ही वे मार्गदर्शक हैं जो आने वाली पीढ़ी के भविष्य की नींव मजबूत करते हैं।”
