
Haryana सहित पूरे उत्तर भारत में मानसूनी बारिश आफत बनकर बरस रही है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में जलभराव के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। खेत और गांव पानी में डूब गए हैं। हरियाणा में भी कई जिलों में जलभराव से किसानों की फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। गांवों में निकासी की व्यवस्था ठप्प होने से गलियों में भी पानी खड़ा हो गया है।
किसानों को राहत देने के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल
आपातकालीन स्थिति को देखते हुए हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने किसानों की राहत के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने फसल नुकसान पंजीकरण के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल 12 जिलों के 1402 गांवों के लिए 10 सितंबर तक खोलने का फैसला किया है। अब तक 38,286 किसानों ने अपनी फसल खराबी का दावा दर्ज करवाया है और कुल पंजीकृत क्षेत्रफल 2,42,945.15 एकड़ तक पहुँच गया है।
इन 12 जिलों में प्रभावित गांवों की संख्या इस प्रकार है: रोहतक में 41, चरखी दादरी में 34, हिसार में 86, पलवल में 59, सिरसा में 6, भिवानी में 43, रेवाड़ी में 7, कुरुक्षेत्र में 75, यमुनानगर में 600, नूंह में 166, फतेहाबाद में 21 और झज्जर में 264 गांव शामिल हैं।
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जिला राजस्व अधिकारी पोर्टल के माध्यम से मिले सभी दावों की विशेष गिरदावरी करेंगे। इसके आधार पर किसानों को फसल नुकसान का सही आंकलन कर मुआवजा दिया जाएगा।
इनमें 12 जिलों में रोहतक के 41, चरखी दादरी के 34, हिसार के 86, पलवल के 59, सिरसा के 6, भिवानी के 43, रेवाड़ी के 7, कुरुक्षेत्र के 75, यमुनानगर के 600, नूंह के 166, फतेहाबाद के 21 और झज्जर के 264 गांव हैं। जिला राजस्व अधिकारी पोर्टल के जरिए से प्राप्त दावों की विशेष गिरदावरी करेंगे।
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किसानों से अपील
पंजिकृत दावों की जांच और निर्धारित मानकों के आधार पर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। प्रदेश सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे बढ़ी हुई समय सीमा का पूरा फायदा उठाएं और अपनी फसल खराबी का पंजीकरण जल्द करवाएं। इससे उन्हें आर्थिक मदद मिलेगी और उनका नुकसान भरपाई किया जा सकेगा।
