शनिवार, 24 अक्टूबर 2026

Panipat बना दुनिया का सबसे बड़ा रीसाइक्लिंग हब, ग्रीन क्रांति में दिखाया कमाल, इतिहास रच रहा शहर

Written by: सुनील कुमार

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Panipat News: इतिहास में तीन युद्धों के लिए प्रसिद्ध पानीपत अब 'हैंडलूम सिटी' से आगे बढ़कर ग्रीन क्रांति का नेतृत्व कर रहा है। पानीपत की इंडस्ट्रीज अब बिना केमिकल डाई और पानी…


Panipat बना दुनिया का सबसे बड़ा रीसाइक्लिंग हब, ग्रीन क्रांति में दिखाया कमाल, इतिहास रच रहा शहर
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Panipat News: इतिहास में तीन युद्धों के लिए प्रसिद्ध पानीपत अब ‘हैंडलूम सिटी’ से आगे बढ़कर ग्रीन क्रांति का नेतृत्व कर रहा है। पानीपत की इंडस्ट्रीज अब बिना केमिकल डाई और पानी की बर्बादी के पुराने कपड़ों को रीसाइक्लिंग कर दुनिया भर में उपयोगी बना रही हैं। शहर में रोजाना करीब 30 लाख किलोग्राम रीसाइक्लिंग टेक्सटाइल का उत्पादन होता है। यहां बने उत्पाद न केवल भारत के अलग-अलग हिस्सों में भेजे जाते हैं, बल्कि विदेशों में भी निर्यात किए जा रहे हैं, जिससे पानीपत वैश्विक रीसाइक्लिंग हब के रूप में उभर रहा है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 120वें एपिसोड में पानीपत की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा, “पानीपत ने अन्य शहरों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है और यह वैश्विक टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग का प्रमुख केंद्र बन रहा है।” पीएम मोदी की तारीफ के बाद पानीपत के व्यापारियों और उद्योग जगत में उत्साह का माहौल है और यह मॉडल देश के अन्य शहरों के लिए भी सीख बन सकता है।

तुर्की की जगह पानीपत को मिला खिताब

हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष प्रीतम सचदेवा ने बताया कि यह खिताब अब तुर्की की जगह पानीपत को मिला है। उन्होंने बताया कि जिले की करीब 200 स्पिनिंग मिलों में हर दिन लगभग 300 टन बेकार कपड़ों को रीसाइक्लिंग किया जा रहा है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने बताया कि जर्मनी, स्पेन, इटली, फ्रांस, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों से पुराने कपड़े सस्ते दाम पर मंगाए जाते हैं और उनसे धागा बनाकर चादर, कंबल, कालीन जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं।

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रोजगार भी बढ़ा, 80-90% यार्न का होता है निर्यात

पानीपत चैप्टर के अध्यक्ष और निर्यातक विनोद धमीजा के अनुसार यहां उत्पादित 80-90 प्रतिशत रीसाइक्लिंग यार्न का निर्यात किया जाता है। सफेद कपड़ों से ताजा यार्न और रंगीन कपड़ों से रंगीन यार्न तैयार होता है, जो मिंक कंबल और फ्लोर कवरिंग में इस्तेमाल होता है। इस प्रक्रिया से निकली धूल भी बेकार नहीं जाती, बल्कि गद्दों और सोफों में भरने के लिए उपयोग में लाई जाती है। इस उद्योग से करीब 70,000 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है, जिससे पानीपत ग्रीन क्रांति के साथ रोजगार का हब भी बनता जा रहा है।

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सुनील कुमार
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सुनील कुमार (Best E News) हरियाणा की क्षेत्रीय खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनकी प्राथमिकता क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं, जनसमस्याओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाना है। View all posts by सुनील कुमार →

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