गुरूवार, 22 अक्टूबर 2026

Delhi में नया फीस कानून लागू! प्राइवेट स्कूलों पर बड़ी लगाम—क्या अब खत्म होगा बेवजह बढ़ी फीस का खेल?

Written by: सुनील कुमार

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Delhi के प्राइवेट स्कूलों में फीस तय करने और रेगुलेशन में ट्रांसपेरेंसी पक्का करने के लिए, सरकार ने Delhi स्कूल एजुकेशन (Transparency in Fee Determination and Regulation) एक्ट, 2025 को नोटिफाई किया…


Delhi में नया फीस कानून लागू! प्राइवेट स्कूलों पर बड़ी लगाम—क्या अब खत्म होगा बेवजह बढ़ी फीस का खेल?
Delhi में नया फीस कानून लागू! प्राइवेट स्कूलों पर बड़ी लगाम—क्या अब खत्म होगा बेवजह बढ़ी फीस का खेल?
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Delhi के प्राइवेट स्कूलों में फीस तय करने और रेगुलेशन में ट्रांसपेरेंसी पक्का करने के लिए, सरकार ने Delhi स्कूल एजुकेशन (Transparency in Fee Determination and Regulation) एक्ट, 2025 को नोटिफाई किया है। असेंबली से पास होने के चार महीने बाद, इस कानून को लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्सेना (Lieutenant Governor VK Saxena) की मंज़ूरी मिल गई।

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नए कानून से प्राइवेट स्कूल फीस कलेक्शन के सभी मामलों में ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी के दायरे में आएंगे। नोटिफ़िकेशन के मुताबिक, स्कूल अब सिर्फ़ तय हेड्स के तहत ही फीस ले पाएंगे: रजिस्ट्रेशन फीस (registration fee), एडमिशन फीस (admission fee), ट्यूशन फीस (tuition fee), एनुअल फीस (annual fee) और डेवलपमेंट फीस (development fee)। रजिस्ट्रेशन फीस (registration fee) ₹25, एडमिशन फीस (admission fee) ₹200 और कॉशन मनी (caution money) ₹500 तय की गई है, जिसे ब्याज के साथ चुकाना होगा। डेवलपमेंट फीस एनुअल ट्यूशन फीस (annual tuition fee) के 10 परसेंट से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए।

कैपिटेशन फीस पूरी तरह बैन

कानून में साफ़ तौर पर कहा गया है कि किसी भी तरह की कैपिटेशन फीस (capitation fees) या इनडायरेक्ट कलेक्शन (indirect collection) पूरी तरह बैन रहेगा। स्कूलों को सभी यूज़र-बेस्ड फीस नो-प्रॉफिट, नो-लॉस बेसिस पर लेनी होगी, और सिर्फ़ उन स्टूडेंट्स से लेनी होगी जो संबंधित सर्विस का इस्तेमाल करते हैं। बताई गई फीस से ज़्यादा फीस को फ्रॉड माना जाएगा।

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स्कूलों को अब अलग-अलग आइटम के लिए अलग-अलग अकाउंट रखने होंगे, एक फिक्स्ड एसेट रजिस्टर रखना होगा, और सभी फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन (financial transactions) को ट्रांसपेरेंट तरीके से रिकॉर्ड करना होगा। पेरेंट्स से इकट्ठा किया गया फंड स्कूल चलाने वाली सोसाइटी या ट्रस्ट को ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। अगर किसी साल सरप्लस बचता है, तो उसे या तो रिफंड कर दिया जाएगा या भविष्य की फीस में एडजस्ट कर दिया जाएगा।

एक स्कूल-लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी बनाई जाएगी

कानून का दायरा सभी प्राइवेट स्कूलों पर बराबर लागू होगा, चाहे वे माइनॉरिटी कैटेगरी (minority category) में आते हों या सरकारी ज़मीन पर नहीं बने हों। इसके अलावा, कोई भी स्कूल फीस न देने पर स्टूडेंट्स पर कोई पेनल्टी नहीं लगा पाएगा, जैसे रिजल्ट रोकना, निकालना, या एडमिशन से मना करना।

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इस कानून की एक खास बात यह है कि हर स्कूल एक स्कूल-लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी (school-level fee regulation committee) बनाएगा, जिसे हर साल 15 जुलाई तक बनाना होगा। इस कमेटी में मैनेजमेंट का एक रिप्रेजेंटेटिव, डायरेक्टरेट ऑफ़ एजुकेशन (Directorate of Education) का एक अधिकारी और पेरेंट्स में से लॉटरी से चुने गए पाँच मेंबर होंगे, जिसमें महिलाएँ, SC, ST, और सामाजिक और एजुकेशनल रूप से पिछड़े वर्गों के रिप्रेजेंटेशन शामिल होंगे।

स्कूलों को 31 जुलाई तक अपना प्रपोज़्ड फीस स्ट्रक्चर कमेटी को जमा करना होगा, जो इसे मंज़ूरी दे सकती है या कम कर सकती है, लेकिन बढ़ा नहीं सकती। एक बार फाइनल होने के बाद, अगले तीन एकेडमिक सालों (academic years) के लिए फीस फिक्स रहेगी। सरकार का दावा है कि इस कानून से प्राइवेट स्कूलों (private schools) की मनमानी पर रोक लगेगी और पेरेंट्स को राहत मिलेगी।

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सुनील कुमार
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सुनील कुमार (Best E News) हरियाणा की क्षेत्रीय खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनकी प्राथमिकता क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं, जनसमस्याओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाना है। View all posts by सुनील कुमार →

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