
रेवाड़ी: इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर के प्रबंधन विभाग द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, व्यावहारिक ज्ञान एवं प्रबंधन संबंधी बारीकियों को समझाने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश के मैकलोडगंज एवं धर्मशाला के लिए चार दिवसीय शैक्षिक भ्रमण का आयोजन किया गया है। 48 विद्यार्थियों एवं शिक्षक प्रभारियों का यह दल विश्वविद्यालय परिसर से उत्साहपूर्वक रवाना हुआ।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि केवल किताबी ज्ञान से प्रबंधन की बारीकियों को पूर्ण रूप से नहीं समझा जा सकता। शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए कक्षा के सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक व्यावसायिक परिस्थितियों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में निर्णय लेने की क्षमता, नेतृत्व गुण, अनुशासन, साहस और आत्मविश्वास का विकास होता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का सदैव प्रयास रहता है कि विद्यार्थियों को ऐसा शैक्षणिक वातावरण और मंच मिले, जिससे वे भविष्य की वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सकें।
जॉब-क्रिएटर बनने के लिए किया प्रेरित: आगे उद्योग जगत (इंडस्ट्री) और व्यावहारिक शिक्षा पर बल देते हुए कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने कहा कि वर्तमान दौर में वही विद्यार्थी सफलता प्राप्त कर सकते हैं जो कॉर्पोरेट और औद्योगिक दुनिया की वास्तविक आवश्यकताओं तथा कार्यप्रणाली से भली-भांति परिचित हों। उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों का भ्रमण विद्यार्थियों को सप्लाई चेन, प्रोडक्शन मैनेजमेंट और मार्केट डायनेमिक्स को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर देता है, जिससे उनमें एंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमशीलता) की भावना भी विकसित होती है। उद्योग और अकादमी (Industry-Academia Collaboration) के बीच का यह सीधा संवाद विद्यार्थियों को केवल जॉब-सीकर नहीं, बल्कि जॉब-क्रिएटर बनने के लिए प्रेरित करता है।
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कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों के केवल शैक्षणिक ही नहीं, बल्कि उनके समग्र, सामाजिक व व्यावसायिक विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस प्रकार की शैक्षणिक यात्राएं विद्यार्थियों को नए परिवेश, आतिथ्य सत्कार, स्थानीय उद्यमों और व्यावसायिक चुनौतियों को करीब से देखने व सीखने का अमूल्य अवसर प्रदान करती हैं।
विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने आगे जोड़ा कि अनुशासन, समय प्रबंधन और नैतिक मूल्य ही किसी भी सफल प्रबंधक की वास्तविक पहचान होते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आउटडोर स्टडी टूर्स विद्यार्थियों में आपसी सामंजस्य, संसाधन प्रबंधन (Resource Management) और विपरीत परिस्थितियों में त्वरित समाधान खोजने की क्षमता को व्यावहारिक रूप से विकसित करते हैं।
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प्रबंधन विभाग की अध्यक्ष प्रो. रितु बजाज ने कुलपति प्रो. असीम मिगलानी एवं कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व के कुशल मार्गदर्शन में विभाग द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह भ्रमण विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष अनुभव देने के साथ-साथ उनमें टीम भावना, सामाजिक जिम्मेदारी और व्यावहारिक निर्णय क्षमता को विकसित करने में मील का पत्थर साबित होगा।
वाणिज्य एवं प्रबंधन संकाय की अधिष्ठाता प्रो. अदिति शर्मा ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन, आतिथ्य सत्कार (हॉस्पिटैलिटी) और स्थानीय व्यवसायों का अध्ययन प्रबंधन के विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से फलदायी है। इससे विद्यार्थी पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर उद्यमशीलता के व्यावहारिक पहलुओं को समझते हैं।
यात्रा के फैकल्टी इंचार्ज डॉ. सुशांत यादव ने भ्रमण की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इस शैक्षिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थी त्रियुंड ट्रेक, भागसूनाग मंदिर व जलप्रपात, दलाई लामा मंदिर, धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम एवं बगलामुखी मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों का दौरा करेंगे। इसके साथ ही, विद्यार्थी स्थानीय औद्योगिक इकाइयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का भ्रमण कर उत्पादन, विपणन (मार्केटिंग), मानव संसाधन (HR), वित्तीय प्रबंधन और सेवा क्षेत्र के संचालन (Operations) से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी हासिल करेंगे।
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इस शैक्षिक भ्रमण में प्रबंधन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. जसविंदर सिंह एवं वाणिज्य विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रियंका रंगा शिक्षक प्रभारी (फैकल्टी गाइड) के रूप में विद्यार्थियों के साथ जा रहे हैं, जो यात्रा के दौरान शैक्षणिक गतिविधियों और व्यवस्थाओं का मार्गदर्शन करेंगे।
