Wednesday, 14 October 2026

मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कैसे हटाया जा सकता है, जानिए संवैधानिक प्रावधान

Written by: सुनील कुमार

Published:

Best E News: देश भर में सर को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त का हटाने को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। दबाब बनाना व अपने मांग रखना…


मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कैसे हटाया जा सकता है, जानिए संवैधानिक प्रावधान
मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कैसे हटाया जा सकता है, जानिए संवैधानिक प्रावधान
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Best E News: देश भर में सर को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त का हटाने को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। दबाब बनाना व अपने मांग रखना जायज है। लेकिन इस मांग को लेकर सबसे पहले हमें यह भी पता होना चाहिए कि कानूनन मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कैसे हटाया जा सकता है। हटाने के संवैधानिक प्रावधान क्या है।

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संविधान जागरूकता श्रृंखला के तहत कैलाश चंद एडवोकेट ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने के लिए संविधान में विशेष और कठोर प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को सुरक्षित रखना है।

उन्होंने बताया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं, लेकिन उन्हें सामान्य सरकारी अधिकारियों की तरह सीधे पद से नहीं हटाया जा सकता। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उन्हीं आधारों और प्रक्रिया के तहत हटाया जा सकता है, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए निर्धारित हैं। इसके लिए सिद्ध कदाचार या असमर्थता जैसे आधार आवश्यक हैं।

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संसद में प्रस्ताव और जांच की प्रक्रिया

कैलाश चंद एडवोकेट के अनुसार, पद से हटाने की प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन में प्रस्ताव का नोटिस देने से शुरू हो सकती है। लोकसभा में नोटिस पर कम से कम 100 और राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं। संबंधित सदन के अध्यक्ष या सभापति नोटिस पर विचार कर उसे स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं।

प्रस्ताव स्वीकार होने पर न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की जाती है। इसमें सर्वोच्च न्यायालय का एक न्यायाधीश, किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता शामिल होता है। समिति आरोपों की जांच करती है और संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर देती है।

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यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो संसद में प्रस्ताव पर आगे विचार किया जाता है। इसे दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित करना आवश्यक है। इसके लिए सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई मत प्रस्ताव के पक्ष में होने चाहिए। दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए औपचारिक समावेदन प्रस्तुत किया जाता है। राष्ट्रपति के आदेश के बाद ही पद से हटाने की प्रक्रिया पूरी होती है।

अन्य निर्वाचन आयुक्तों के लिए अलग व्यवस्था

उन्होंने बताया कि अन्य निर्वाचन आयुक्तों और क्षेत्रीय आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना पद से नहीं हटाया जा सकता। संविधान में यह व्यवस्था निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

कैलाश चंद एडवोकेट ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं। संविधान केवल संस्थाओं के अधिकार और कर्तव्य तय नहीं करता, बल्कि उनकी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आवश्यक प्रावधान भी करता है। अनुच्छेद 324(5) और संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया को समझना नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है।

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— कैलाश चंद एडवोकेट

सुनील कुमार
About the Author सुनील कुमार

सुनील चौहान हरियाणा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव है और वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। View all posts by सुनील कुमार →

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