रविवार, 25 अक्टूबर 2026

थारा फूफा जिंदा है दुलीचंद फिर आये चर्चा में, यहां पढ़ें अपडेट

Written by: सुनील कुमार

Published:

रोहतक: हरियाणा के रोहतक में ‘थारा फूफा जिंदा है’ अभियान से देशभर में चर्चा में आए दुलीचंद का 106 साल की उम्र में निधन हो गया। पेंशन कटने के बाद खुद को…


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रोहतक: हरियाणा के रोहतक में ‘थारा फूफा जिंदा है’ अभियान से देशभर में चर्चा में आए दुलीचंद का 106 साल की उम्र में निधन हो गया। पेंशन कटने के बाद खुद को जिंदा साबित करने के लिए उन्होंने अनोखा तरीका अपनाया था। 102 साल की उम्र में दूल्हा बनकर बारात निकालने के कारण वह सुर्खियों में आए थे। क्यों कि उनकों सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखाकर उनकी पेंशन बंद कर दी गई थी।

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थारा फूफा जिंदा है दुलीचंद फिर आये चर्चा में, यहां पढ़ें अपडेट File photo

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निकाली थी बारात’ अपने आप को जिला प्रशासन के सामने जिंदा दिखाने के लिए प्रसासन के विरोध में अपनी बारात निकाली और कहा था ‘थारा फूफा जिंदा है’ । उनके इस अनोखे विरोध ने प्रशासन का ध्यान खींचा और मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया। इसी के बाद ने उनको इसी नाम से जान जाता था।

70 सदस्यों का था परिवार

दुलीचंद का परिवार भी काफी बड़ा था। बताया जाता है कि उनके परिवार में करीब 70 सदस्य थे। उनकी कहानी सरकारी रिकॉर्ड में हुई गलती और पेंशन से जुड़ी समस्याओं के खिलाफ एक अनोखे विरोध के रूप में याद की जाएगी। 106 साल की उम्र में उनके निधन से परिवार और परिचितों में शोक है। ‘थारा फूफा जिंदा है’ के जरिए पहचान बनाने वाले दुलीचंद की कहानी लंबे समय तक लोगों को याद रहेगी।

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102 साल की उम्र में बने थे दूल्हा: बता दे पेंशन कटने के बाद दुलीचंद ने अपनी पेंशन दोबारा शुरू करवाने के लिए 102 साल की उम्र में दूल्हे बनकर बारात निकालवी थी। उनकी बारात और विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं। इस अनोखे अंदाज ने उन्हें हरियाणा ही नहीं, बल्कि देशभर में पहचान दिलाई। एक बार फिर वे सुर्खियों मे आ गए है।

अधिकारियों के सामने रखे दस्तावेज
रिपोर्टों के मुताबिक, दुलीचंद ने अपनी पहचान साबित करने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, फैमिली आईडी और बैंक से जुड़े दस्तावेज भी दिखाए। वे अपने समर्थकों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों और तत्कालीन राजनीतिक प्रतिनिधियों तक पहुंचे, ताकि उनकी पेंशन दोबारा शुरू कराने की कार्रवाई हो सके। इस मामले में प्रशासन की ओर से जांच और पेंशन बहाल कराने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिए जाने की खबरें भी सामने आई थीं।
सरकारी रिकॉर्ड की गलती ने खड़े किए सवाल
दुलीचंद का मामला केवल एक बुजुर्ग की पेंशन का मुद्दा नहीं था। इसने यह सवाल भी उठाया कि यदि किसी व्यक्ति को गलती से सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज कर दिया जाए, तो उसे अपनी पहचान साबित करने और सरकारी योजनाओं का लाभ दोबारा पाने में कितनी परेशानी हो सकती है बुजुर्गों के लिए पेंशन आर्थिक सहारे का महत्वपूर्ण साधन होती है। ऐसे में रिकॉर्ड में गलती होने पर समय पर सुधार और शिकायतों का शीघ्र समाधान जरूरी है, ताकि पात्र लोगों को उनके अधिकारों से वंचित न रहना पड़े।

 

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सुनील कुमार
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सुनील कुमार (Best E News) हरियाणा की क्षेत्रीय खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनकी प्राथमिकता क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं, जनसमस्याओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाना है। View all posts by सुनील कुमार →

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