
रोहतक: हरियाणा के रोहतक में ‘थारा फूफा जिंदा है’ अभियान से देशभर में चर्चा में आए दुलीचंद का 106 साल की उम्र में निधन हो गया। पेंशन कटने के बाद खुद को जिंदा साबित करने के लिए उन्होंने अनोखा तरीका अपनाया था। 102 साल की उम्र में दूल्हा बनकर बारात निकालने के कारण वह सुर्खियों में आए थे। क्यों कि उनकों सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखाकर उनकी पेंशन बंद कर दी गई थी।

थारा फूफा जिंदा है दुलीचंद फिर आये चर्चा में, यहां पढ़ें अपडेट File photo
निकाली थी बारात’ अपने आप को जिला प्रशासन के सामने जिंदा दिखाने के लिए प्रसासन के विरोध में अपनी बारात निकाली और कहा था ‘थारा फूफा जिंदा है’ । उनके इस अनोखे विरोध ने प्रशासन का ध्यान खींचा और मामला प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया। इसी के बाद ने उनको इसी नाम से जान जाता था।
70 सदस्यों का था परिवार
दुलीचंद का परिवार भी काफी बड़ा था। बताया जाता है कि उनके परिवार में करीब 70 सदस्य थे। उनकी कहानी सरकारी रिकॉर्ड में हुई गलती और पेंशन से जुड़ी समस्याओं के खिलाफ एक अनोखे विरोध के रूप में याद की जाएगी। 106 साल की उम्र में उनके निधन से परिवार और परिचितों में शोक है। ‘थारा फूफा जिंदा है’ के जरिए पहचान बनाने वाले दुलीचंद की कहानी लंबे समय तक लोगों को याद रहेगी।
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102 साल की उम्र में बने थे दूल्हा: बता दे पेंशन कटने के बाद दुलीचंद ने अपनी पेंशन दोबारा शुरू करवाने के लिए 102 साल की उम्र में दूल्हे बनकर बारात निकालवी थी। उनकी बारात और विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं। इस अनोखे अंदाज ने उन्हें हरियाणा ही नहीं, बल्कि देशभर में पहचान दिलाई। एक बार फिर वे सुर्खियों मे आ गए है।
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