
रेवाड़ी (Best E News)। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने ने कहा कि महाराजा अग्रसेन के विचार और जीवन मूल्य आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं। पीठ के अंतर्गत पीएचडी शोध के लिए 15 हजार रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की गई। कुलपति की ओर से शोध के लिए एक अतिरिक्त पीएचडी सीट उपलब्ध कराने पर भी आभार जताया गया।

इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर के कल्पना चावला सभागार में महाराजा अग्रसेन जयंती के अवसर पर संगोष्ठी आयोजित की गई। हरियाणा प्रदेश वैश्य महासम्मेलन के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम का विषय ‘अग्रसेन दर्शन: आधुनिक युग में प्रासंगिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व से स्टार्टअप और व्यावसायिक उत्कृष्टता’ रहा। मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने महाराजा अग्रसेन पीठ के अंतर्गत पीएचडी शोध के लिए 15 हजार रुपये की छात्रवृत्ति देने की घोषणा की।
युवाओं को रोजगार देने वाला बनने का आह्वान
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने की। विशिष्ट अतिथि हरियाणा प्रदेश वैश्य महासम्मेलन के प्रदेश अध्यक्ष एवं सोनीपत के महापौर राजीव जैन रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में रेवाड़ी के चार्टर्ड अकाउंटेंट नवीन सिंघल ने विचार रखे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अतिथियों का स्वागत किया। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने महाराजा अग्रसेन पीठ की स्थापना के लिए कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार जताया।
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कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार देने वाले बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा अपने ज्ञान का उपयोग कृषि, जल संरक्षण और स्थानीय समस्याओं के समाधान में करें। राजीव जैन ने महाराजा अग्रसेन के अहिंसा, सहकारिता और सामाजिक कल्याण के सिद्धांतों को अपनाने पर जोर दिया।

‘एक ईंट, एक रुपया’ के सिद्धांत पर चर्चा
मुख्य वक्ता सीए नवीन सिंघल ने महाराजा अग्रसेन के आर्थिक दर्शन पर प्रकाश डालते हुए ‘एक ईंट, एक रुपया’ के सिद्धांत को सामूहिक सहयोग और आर्थिक आत्मनिर्भरता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाना, व्यवसाय में ईमानदारी रखना और दूसरों की उन्नति में सहयोग करना जरूरी है।
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इस अवसर पर महाराजा अग्रसेन पीठ की प्रभारी डॉ. ममता अग्रवाल ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। मंच संचालन हरियाणा प्रदेश वैश्य महासम्मेलन के सचिव दुर्गा दत्त गोयल ने किया। कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने अतिथियों का आभार जताते हुए विश्वविद्यालय में बड़े सभागार के निर्माण के लिए सरकार से वित्तीय सहायता दिलाने का आग्रह किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी और समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
