
Haryana Pollution: देश के कई शहरों में, खासकर हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में, वायु प्रदूषण का स्तर फिर से खतरनाक हो गया है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ने खतरनाक सीमा पार कर ली है, लेकिन सरकारी तंत्र अब भी निष्क्रिय दिखाई दे रहा है। देश में वायु प्रदूषण को लेकर सार्वजनिक शिकायतों में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन समाधान के प्रयास सीमित हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की दो हालिया रिपोर्टें — “Redressal Status – 1417” और “Redressal Hotspot Status – 1404” — इस बात को उजागर करती हैं कि सरकार की दावों के विपरीत कार्यवाही धीमी और अपर्याप्त है।
शिकायतों का निस्तारण और आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों (अक्टूबर 2021 से अक्टूबर 2025) में देशभर में 13,690 वायु प्रदूषण शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से केवल 9,610 मामलों को हल किया गया। इसका मतलब है कि 70 प्रतिशत शिकायतें निपटाई गईं, जबकि 30 प्रतिशत अभी भी लंबित हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि SAMEER ऐप के माध्यम से दर्ज शिकायतों को अपेक्षाकृत जल्दी निपटाया गया, जबकि इंटरनेट मीडिया और अन्य ऑनलाइन चैनलों से प्राप्त शिकायतें जवाबदेही की कमी के कारण लंबित रहीं। हरियाणा में राज्य स्तरीय हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का निस्तारण दर केवल 46 प्रतिशत रही, जो सरकारी प्रणाली की धीमी गति को दर्शाती है।
SAMEER ऐप और शिकायत निवारण प्रक्रिया
SAMEER ऐप, CPCB का डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो नागरिकों को वायु प्रदूषण संबंधी शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है। इस ऐप के माध्यम से कोई भी व्यक्ति धूल, औद्योगिक धुआं, कचरा जलाना या वाहनों से होने वाले प्रदूषण की शिकायत दर्ज कर सकता है। शिकायत के साथ फोटो या वीडियो भी अपलोड किया जा सकता है। शिकायत स्वतः संबंधित एजेंसी को भेज दी जाती है और इसका औसत निस्तारण समय 7 से 10 दिन है। ऐप पर शिकायत का स्टेटस “Resolved” या “Pending” के रूप में दिखाया जाता है।
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हरियाणा की स्थिति और विशेषज्ञों की राय
CPCB की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में बड़े शहरों ने शिकायतों के निस्तारण में तेजी दिखाई और प्रदूषण स्तर छोटे शहरों की तुलना में कम रहा। 2021 से 2025 के बीच हरियाणा में 2,873 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 2,332 शिकायतें हल की गईं, यानी 81 प्रतिशत निस्तारण दर। गुरुग्राम और फरीदाबाद के नगरपालिका निगम, ट्रैफिक पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थानीय इकाइयों ने 85 से 97 प्रतिशत शिकायतों का समाधान किया। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत निगरानी और कार्रवाई तंत्र के कारण हरियाणा ने दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। इसी कारण बड़े शहरों में प्रदूषण का स्तर छोटे शहरों की तुलना में कम रहा।
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