
धारूहेड़ा (Best E News) कस्बे में करीब 12.78 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे आधुनिक बस स्टैंड का निर्माण निर्धारित समय में पूरा करना चुनौती बना हुआ है। काम कछुआ गति से चल रहा है। Dharuhera Bus Stand परियोजना को अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति को देखते हुए समय पर काम पूरा होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बस स्टैंड शुरू होने से धारूहेड़ा और आसपास के गांवों के लोगों को आवागमन में राहत मिलने की उम्मीद है। परियोजना का शिलान्यास 6 अक्टूबर 2025 को रेवाड़ी के विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने किया था।
2018 में पुरानी बिल्डिंग को किया था कंडम घोषित
धारूहेड़ा का पुराना बस स्टैंड वर्ष 1991 में पांच एकड़ जमीन पर बनाया गया था। भवन की हालत खराब होने के कारण लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने 30 नवंबर 2018 को इसे कंडम घोषित कर दिया था। इसके बाद जुलाई 2023 में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने बस स्टैंड के पुनर्निर्माण की मांग उठाई थी। इसके बाद नए बस स्टैंड के निर्माण प्रस्ताव को मंजूरी मिली।
फ्लाईओवर बनने के बाद बंद हो गया था बसों का प्रवेश
पुराना बस स्टैंड दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित था। वर्ष 2012 में हाईवे पर फ्लाईओवर बनने के बाद बस स्टैंड की ऊंचाई कम पड़ गई, जिससे बसों का प्रवेश बंद हो गया। जयपुर से दिल्ली की ओर जाने वाली बसों को अंडरपास से होकर गुजरना पड़ता था। इससे यात्रियों को परेशानी होने लगी। रखरखाव के अभाव में भवन की हालत लगातार खराब होती गई और वर्ष 2020 में इसे गिरा दिया गया।
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50 गांवों के लोगों को मिलेगा फायदा
नए बस स्टैंड में यात्रियों के लिए प्रतीक्षालय, पेयजल, स्वच्छ शौचालय, टिकट काउंटर, चालक-परिचालकों के लिए विश्राम गृह और पार्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। धारूहेड़ा की कॉलोनियों, औद्योगिक इकाइयों और आसपास के करीब 50 गांवों के लोगों को इसका लाभ मिलेगा। पुराने बस अड्डे के बंद होने के बाद लोगों को बस पकड़ने के लिए रेवाड़ी या भिवाड़ी जाना पड़ता था।Dharuhera Bus Stand
धारूहेड़ा से दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, मानेसर, नीमराना, कोटपूतली, भिवाड़ी, अलवर, तिजारा, कोटा, सोहना, पलवल, मेवात, बावल और रेवाड़ी सहित कई शहरों के लिए बसें चलती हैं। ऐसे में नए बस स्टैंड का निर्माण पूरा होने से यात्रियों, औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों और श्रमिकों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है। अब देखना होगा कि निर्माण एजेंसी तय समयसीमा में परियोजना को पूरा कर पाती है या नहीं।
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