
Best E News: इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी में प्रसिद्ध सांग सम्राट मास्टर नेकी राम की जयंती के उपलक्ष्य में एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मास्टर नेकीराम चेयर, मास्टर नेकीराम साहित्य एवं लोकनाट्य कला संरक्षण परिषद तथा हिंदी विभाग, इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने हरियाणा के महान लोक कवि एवं सांग सम्राट मास्टर नेकी राम के जीवन, साहित्य और सांस्कृतिक योगदान पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मास्टर नेकी राम ने सांग, रागनी और लोकनाट्य के माध्यम से हरियाणा की लोक संस्कृति को समृद्ध करने के साथ-साथ सामाजिक चेतना को भी नई दिशा प्रदान की।
उन्होंने कहा कि मास्टर नेकीराम की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए विश्वविद्यालय गंभीरता से कार्य कर रहा है। उनके द्वारा रचित साहित्य पर पीएचडी हेतु शोध कार्य करने की दिशा में योजना तैयार की जा चुकी है, जिससे उनके साहित्यिक योगदान का अकादमिक स्तर पर भी व्यापक अध्ययन एवं मूल्यांकन किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि मास्टर नेकी राम केवल कवि और सांग कलाकार नहीं थे, बल्कि वे हरियाणा की मिट्टी की आवाज, लोकजीवन के संवाहक और सामाजिक चेतना के सशक्त प्रहरी थे। मात्र 14 वर्ष की आयु में ‘भगत पूरणमल’ का सांग प्रस्तुत करना उनकी असाधारण प्रतिभा का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मास्टर नेकी राम ने अपने जीवन के लगभग छह दशक सांग और लोक साहित्य की सेवा में समर्पित किए। उनके सांगों में राजा भोज-भानवती, राजा रिसालू, हीर-रांझा, लीलो-चमन, फूल सिंह-नौटंकी, रूप-बसंत, राजा हरिश्चंद्र-तारावती, मीराबाई, भगत पूरणमल, पिंगला-भरथरी और जानी चोर जैसे अनेक लोकप्रिय प्रसंग शामिल रहे।
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उन्होंने कहा कि मास्टर नेकी राम की कला में केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, नैतिक शिक्षा, सामाजिक चेतना और राष्ट्र प्रेम का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने हरियाणवी भाषा को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाकर लोकभाषा और लोक संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाया।उन्होंने कहा कि आज आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में नई पीढ़ी को अपनी लोकभाषा, लोकगीत, लोकनाट्य और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोक साहित्य किसी समाज की सामूहिक स्मृति और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें और लोककला एवं लोक साहित्य को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाएं।हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ मंजू पुरी ने सभी का स्वागत अभिनन्दन करते हुए कहा कि-अकादमिक दृष्टि से यदि हम मास्टर नेकीराम जी के जीवन और कृतित्व का विश्लेषण करें, तो हम पाएंगे कि वे लोक चेतना के एक प्रखर चिंतक थे। मास्टर नेकीराम जी की विचार-धारा को अपने पाठ्यक्रम और शोध गतिविधियों का अभिन्न हिस्सा बनाएं। यहीं उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले प्रो. सुनील कुमार ने मास्टर नेकीराम के साहित्यिक एवं लोक सांस्कृतिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सांग और लोकनाट्य परंपरा को समृद्ध करने तथा जन-जन तक लोक संस्कृति एवं सामाजिक संदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।कवि सम्मेलन में सभी कवियों ने अपनी रचनाओं से मास्टर नेकीराम के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान की सराहना करते हुए उन्हें याद किया। ख्याति प्राप्त कवि हलचल हरियाणवी ने हरियाणा का ताऊ कविता से खूब ठहाके लगवाए। हास्य कवि मास्टर महेंद्र ने प्रेम पत्र बनाम एप्लीकेशन और बनवारी का रक्षाबंधन कविता से खूब तालियां बटोरी। फरीदाबाद से आए कवि यशदीप कौशिक ने नमामी माता भारती के माध्यम से राष्ट्र की आराधना की।
आलोक भांडोरिया ने आओ अपने सपनों का भारत बनाएं, बेटी बचाएं-बेटी पढ़ाएं के जरिए बेटी बचाओ का संदेश दिया। राजेश भुलक्कड़ ने यारों मुझको वो इंसान बुरा लगता है, जिसको मेरा हिंदुस्तान बुरा लगता है और मनोज कौशिक ने जात पात के ऊँच नीच के रंग सभी धुल जाएं, एक तिरंगे के रंग में बस हर कोई रंग जाएं के जरिए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि डॉ. मुकुट अग्रवाल ने सरस्वती वंदना करते हुए अपने शानदार काव्य पाठ से खूब वाहवाही लूटी। इस अवसर पर राष्ट्रपति अवार्डी किसान चौ. भूपेंद्र सिंह, भूप सिंह भारती, रतनलाल अहरोदिया, आरएस सांभरिया, कांशीराम खींची, राजकुमार जलवा, सत्यनारायण सांभरिया, रोशनलाल आर्य, मेघवंशी महेंद्र झाजरिया, महिपाल फदनी, रामनिवास, महेश सहित विश्वविद्यालय के कर्मचारी और छात्र मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जागीर नागर और हास्य कवि आलोक भांडोरिया ने किया।
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