
हरियाणा (Best24News): हरियाणा के भिवानी अनाज मंडी में अपनी खून-पसीने की बाजरे की फसल बेचने पहुंच रहे किसानों को सरकारी खरीद न होने के कारण भारी आर्थिक नुकसान और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,900 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, लेकिन मंडी में सरकारी खरीद एजेंसियों की अनुपस्थिति के चलते निजी व्यापारी (Private Buyers) किसानों से ₹2,200 से ₹2,300 प्रति क्विंटल के कम भाव पर बाजरा खरीद रहे हैं।
भावांतर भरपाई योजना के बाद भी ₹50 से ₹100 का घाटा
मंडी में फसल लेकर पहुंचे किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा ‘भावांतर भरपाई योजना’ के तहत ₹600 प्रति क्विंटल का भावांतर (अनुदान) देने का प्रावधान है। हालांकि, बाजार भाव इतना कम मिलने के कारण भावांतर की राशि जोड़ने के बाद भी उन्हें प्रति क्विंटल ₹50 से ₹100 का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है। भिवानी मंडी में अब तक बाजरे की कुल आवक 75,000 क्विंटल तक पहुंच चुकी है। इसमें से करीब 26,000 क्विंटल बाजरा निजी व्यापारी कम दामों में खरीद चुके हैं।
किसान परेशान: समय पर सरकारी खरीद शुरू न होने से किसानों को मजबूरी में अपनी फसल औने-पौने दामों पर निजी व्यापारियों को बेचनी पड़ रही है। किसानों और आढ़तियों की बढ़ती समस्याओं को देखते हुए भिवानी अनाज मंडी में राजनीतिक हलचल और जनप्रतिनिधियों का आना-जाना तेज हो गया है। घनश्याम सर्राफ (विधायक, भिवानी): मंडी पहुंचकर किसानों की समस्याओं को सुना और अधिकारियों को खरीद में तेजी लाने के निर्देश दिए।
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श्रुति चौधरी (सिंचाई मंत्री, हरियाणा): मंडी का दौरा कर किसानों और व्यापारियों को सुचारू खरीद प्रक्रिया का आश्वासन दिया। आदित्य सुरजेवाला (कांग्रेस विधायक, कैथल) ने किसानों के बीच पहुंचकर सरकार की खरीद नीति पर सवाल उठाए और कहा कि किसानों को उनका पूरा MSP हक मिलना चाहिए।
किसान संगठनों ने मांग की है कि हैफेड (HAFED) और अन्य सरकारी एजेंसियां तुरंत प्रभाव से निर्धारित MSP पर बाजरे की सीधी सरकारी खरीद शुरू करें, ताकि किसानों को हो रहे नुकसान से बचाया जा सके।
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