Rewari News: हरियाणा के रेवाड़ी शहर में स्थित चार प्रमुख तालाबों के संरक्षण और पुनरोद्धार की दिशा में नगर परिषद ने अहम कदम उठाया है। मानसून आने से पहले इन तालाबों से पानी निकालने (डी-वाटरिंग) और सफाई कार्य शुरू करने की तैयारी की गई है।
इसके लिए 24.78 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया है। इस पहल का उद्देश्य तालाबों की जल संग्रहण क्षमता बढ़ाना, सफाई कार्यों को गति देना और बरसात के दौरान जलभराव जैसी समस्याओं को कम करना है।
मानसून से पहले शुरू होगी सफाई की तैयारी
नगर परिषद ने सोलहाराही तालाब, बड़ा तालाब, शास्त्री नगर तालाब और नंद सरोवर तालाब में लंबे समय से जमा पानी को निकालने का फैसला लिया है।
अधिकारियों के अनुसार, पानी भरे रहने के कारण गाद हटाने, मरम्मत और रखरखाव जैसे जरूरी कार्य लंबे समय से प्रभावित हो रहे थे। डी-वाटरिंग पूरी होने के बाद इन सभी कार्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा।
24.78 लाख रुपये का टेंडर जारी
परियोजना के लिए 24.78 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया है। इच्छुक एजेंसियों से निर्धारित तिथि तक आवेदन मांगे गए हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित एजेंसी को काम सौंपा जाएगा और मानसून से पहले प्राथमिक कार्य पूरे करने का प्रयास रहेगा।
जल संरक्षण के साथ जलभराव से भी मिलेगी राहत
नगर परिषद का मानना है कि तालाबों की सफाई और गाद निकासी से उनकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ेगी। इससे बरसात के समय अतिरिक्त वर्षा जल को बेहतर तरीके से संग्रहित किया जा सकेगा। साथ ही शहर में जलभराव की समस्या कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
एक साल बाद भी दो तालाबों का हैंडओवर अधर में (Rewari News)
सोलहाराही तालाब और बड़ा तालाब का सुंदरीकरण करोड़ों रुपये की लागत से कराया जा चुका है, लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने के काफी समय बाद भी इन दोनों तालाबों को नियमित रखरखाव के लिए संबंधित विभाग को औपचारिक रूप से नहीं सौंपा गया है। इसके कारण रंगाई-पुताई और अन्य संरचनात्मक हिस्सों की देखरेख प्रभावित हो रही है।
पर्यावरण समिति पहले भी जता चुकी है चिंता
हरियाणा विधानसभा की पर्यावरण समिति ने निरीक्षण के दौरान तालाबों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद रखरखाव को लेकर स्पष्ट व्यवस्था अभी तक सामने नहीं आई है। अधिकारियों से जल्द समाधान निकालने की उम्मीद जताई जा रही है।
चारों तालाबों का ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व
सोलहाराही तालाब शहर के सबसे पुराने जलाशयों में गिना जाता है। इसका निर्माण कई शताब्दियों पहले कराया गया था और यह अपनी ऐतिहासिक पहचान के लिए जाना जाता है।
बड़ा तालाब शहर के प्रमुख तालाबों में शामिल है। इसके आसपास धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां भी होती रहती हैं, इसलिए इसका संरक्षण स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
शास्त्री नगर तालाब घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है। इसकी नियमित सफाई से जलभराव और मच्छरों से जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
नंद सरोवर तालाब, जिसे कई लोग छोटा तालाब भी कहते हैं, शहर की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है। इसके आसपास धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं और समय-समय पर यहां स्वच्छता अभियान चलाए जाते रहे हैं।
नगर परिषद ने क्या कहा?
नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार, डी-वाटरिंग का कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित एजेंसी को काम सौंपा जाएगा। साथ ही तालाबों के रखरखाव और भविष्य की व्यवस्था को लेकर भी बैठक आयोजित की जाएगी।
रेवाड़ी के ऐतिहासिक तालाब केवल जल स्रोत ही नहीं बल्कि शहर की सांस्कृतिक विरासत का भी हिस्सा हैं। समय रहते डी-वाटरिंग और सफाई का कार्य पूरा होने से इन जलाशयों की स्थिति बेहतर होगी, जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और मानसून के दौरान शहर को जलभराव जैसी समस्याओं से राहत मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।













