मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

हरियाणा में रावण के पुतले ऊंचे बनाने की होड़ क्यों? 221 फीट का रिकॉर्ड, यमुनानगर में हुआ था हादसा

Written by: सुनील कुमार

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हरियाणा। दशहरे पर रावण दहन की परंपरा के बीच अब विशालकाय पुतले भी आकर्षण का केंद्र बनने लगे हैं। कहीं 100 फीट तो कहीं 180 और 221 फीट तक ऊंचे रावण बनाए…


हरियाणा में रावण के पुतले ऊंचे बनाने की होड़ क्यों?
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हरियाणा। दशहरे पर रावण दहन की परंपरा के बीच अब विशालकाय पुतले भी आकर्षण का केंद्र बनने लगे हैं। कहीं 100 फीट तो कहीं 180 और 221 फीट तक ऊंचे रावण बनाए जा रहे हैं। रेवाड़ी के बेरली कलां गांव में इस बार 160 फीट ऊंचा रावण तैयार किया गया है, जबकि पंचकूला के सेक्टर-5 स्थित शालीमार ग्राउंड में 221 फीट ऊंचे रावण का दहन 20 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि रावण के पुतलों को लगातार ऊंचा बनाने की होड़ क्यों बढ़ रही है और हरियाणा में अब तक सबसे ऊंचे पुतले का रिकॉर्ड कहां बना था?

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पंचकूला में 221 फीट का रावण

पंचकूला में इस बार 221 फीट ऊंचा रावण तैयार किया गया है। इसके निर्माण पर करीब 34 से 35 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है। इसे तैयार करने में कई महीने लगे हैं। आयोजन को भव्य बनाने के लिए विशाल तलवार और बड़े आकार के जूते भी आकर्षण का हिस्सा हैं।

इससे पहले वर्ष 2019 में चंडीगढ़ के धनास में 221 फीट ऊंचा रावण बनाया गया था। हिंदुस्तान टाइम्स की 11 सितंबर 2025 की रिपोर्ट में भी धनास के इसी पुतले को ट्राइसिटी में अब तक के सबसे ऊंचे रावण के रिकॉर्ड के रूप में बताया गया था। इस लिहाज से पंचकूला का 2026 का पुतला उसी ऊंचाई के बराबर है। हालांकि, पूरे हरियाणा के सभी वर्षों के पुतलों का कोई प्रमाणित आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण इसे निश्चित रूप से राज्य का अब तक का सबसे ऊंचा पुतला कहना उचित नहीं होगा।

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आखिर क्यों बढ़ रही है ऊंचे रावण बनाने की होड़?

दशहरा समितियां अपने आयोजन को खास और यादगार बनाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाती हैं। विशाल पुतले लोगों के आकर्षण का केंद्र बनते हैं और बड़ी संख्या में दर्शकों को मैदान तक खींचते हैं। ऊंचाई, निर्माण की लागत और पुतले की खास बनावट के कारण आयोजन को स्थानीय स्तर पर पहचान भी मिलती है। सोशल मीडिया पर तस्वीरों और वीडियो के प्रसार से ऐसे आयोजनों की चर्चा और बढ़ जाती है।

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हालांकि, ऊंचाई बढ़ाने के साथ निर्माण की लागत, पुतले को खड़ा करने की तकनीक, आग से सुरक्षा और दर्शकों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की जिम्मेदारी भी बढ़ती है। इसलिए आयोजन की भव्यता के साथ सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देना जरूरी है।

5 अक्टूबर 2022 को यमुनानगर में गिर गया था जलता रावण

हरियाणा में रावण दहन के दौरान सुरक्षा को लेकर पहले भी गंभीर सवाल उठ चुके हैं। 5 अक्टूबर 2022 को यमुनानगर में दशहरे के कार्यक्रम के दौरान जलता हुआ रावण का पुतला दर्शकों की ओर गिर गया था। इस घटना में करीब छह लोग घायल हुए थे। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था। उस समय पुलिस ने किसी बड़े जानलेवा नुकसान की सूचना नहीं दी थी।

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यह घटना याद दिलाती है कि रावण के पुतले की ऊंचाई और भव्यता के साथ उसकी मजबूती, दहन की तकनीक और दर्शकों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, इसलिए आयोजन में उत्सव के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।

सुनील कुमार
About the Author सुनील कुमार

सुनील कुमार (Best E News) हरियाणा की क्षेत्रीय खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनकी प्राथमिकता क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं, जनसमस्याओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाना है। View all posts by सुनील कुमार →

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