Blast in Rewari: रेवाड़ी जिले के कस्बा बावल में GLS केमिकल फैक्ट्री में आग लगने का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। एक ओर तो झुलसे कर्मचारी की जान चली गई वहीं सुरक्षा नियमों की अनदेखी के चलते हुए हए हादसे का मामला अब मानवधिकार आयोग तक पहुंच गया है। भेजी गई शिकायत में जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।
केवल कागजो मे होती है जांच: बता दे धारूहेडा स्थित लाइफ लोंग कंपनी में 16 मार्च 2005 की शाम हुए ब्लास्ट में करीब 39 श्रमिक झुलसे थे। जिनमें 16 श्रमिको की मौता हो गई थी। हालाकि प्रशासन लापरवाही के चलते कंपनी के सैंफ्टी मैनेजर व एक कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया था। लेकिन सबसे बडी बात यह है इतने बडे हादसे के बावजूद सुरक्षा नियमो को लेकर कोई सबक नहीं लिया गया।Blast in Rewari
होली से पहले हुआ था हादसा: बता दे कि लाईफ लोग कंपनी देवानंद श्रमिक ठेकेदार शिव की ओर से फैक्ट्री में लगे थे। उन्हें तथा अन्य श्रमिकों को काम के हिसाब से मानदेय मिलता था। पीस की फिनिसंग करने का कार्य करते थे। पीस के अनुसार 35 से 40 पैसे प्रति पीस के हिसाब से मानदेय मिलता था। वह होली पर गांव जाने के लिए तैयारी कर चुके थे पर उससे पहले ही हादसा हो गया।
सामाजिक कार्यकर्ता ने आयोग को भेजी अपनी शिकायत में जिले की सभी कंपनियों का स्पेशल फायर सेफ्टी ऑडिट करवाने और नियमित रूप से सुरक्षा जांच करवाने की मांग की है। सबसे अहम बात यह है पिछले साल होली पर धारूहेड़ा मे हुए इतने बडे हादसे से भी प्रबंधन ने कोई सबक लिया गया है। क्योंकि लापरवाही के चलते ही यह हादसा हुआ है।
शिकायत में जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है। बता दें कि, बावल के सेक्टर-5 स्थित GLS केमिकल फैक्ट्री में 19 मई की सुबह लगी आग में झुलसने से एक कर्मचारी की मौत हो चुकी है तथा पांच अस्पताल में भर्ती है, जिनमें से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। कंपनी के दो कर्मचारी लापता हैं।
जानिए क्या हैं प्रमुख मांगें
- पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए
- श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कठोर दिशा-निर्देश लागू किए जाए।
- दोषी फैक्ट्री प्रबंधन एवं संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
- बावल औद्योगिक क्षेत्र की सभी फैक्ट्रियों का विशेष फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।
- घायल कर्मचारियों को उचित मुआवजा एवं बेहतर उपचार मिले।
- औद्योगिक इकाइयों में नियमित सुरक्षा निरीक्षण अनिवार्य किया जाए।
सुरक्षा मानकों की खामियां उजागर: प्रकाश यादव की ओर से भेजी गई शिकायत में मानवाधिकार आयोग से कहा है इस भीषण अग्निकांड ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की पोल खुल गर्ह है। जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में अक्सर ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। जो श्रमिकों के जीवन और सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन है। केमिकल फैक्ट्री में लगी भीषण आग पर काबू पाने के लिए आसपास के जिलों से भी फायर बिग्रेड बुलानी पड़ी थी।Blast in Rewari
लापरवाही से हुआ हादसा: साफ जाहिर है लापरवाही के चलते ही यह हादसा हुआ है। करीब 12 घंटे से अधिक समय की कड़ी मशक्त के बाद आग पर काबू पाया गया था। कंपनी प्रबंधन और अधिकारियों की मिलीभगत से सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर श्रमिकों की जान को जोखिम में डाला जा रहा है। ऐसे हादसों को रोकने के लिए सभी की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।Blast in Rewari












