
धारूहेड़ा। औद्योगिक कस्बे धारूहेड़ा में रामलीला की परंपरा धीरे-धीरे सिमटती जा रही है। करीब एक दशक पहले यहां 5 स्थानों पर रामलीला का मंचन होता था, लेकिन इस साल केवल दो स्थानों पर ही रामलीला का आयोजन किया गया। दशहरा पर्व पर भी दो जगह रावण दहन होगा। मोबाइल फोन के बढ़ते चलन और नई पीढ़ी में रामलीला के प्रति घटती रुचि को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। इसके चलते रामलीला में दर्शकों की संख्या भी लगातार कम हो रही है।
50 साल से हो रही रामलीला
धारूहेड़ा के लाला मनीराम बाग में श्री राम रामलीला क्लब की ओर से करीब 50 साल से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। इस बार दशहरा पर्व टाउन पार्क के पास मनाया जाएगा, जहां कमेटी की ओर से 50 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया है। रामलीला में राहुल जोशी, लक्ष्मण प्रजापत, लक्ष्मण मोंटी, प्रकाश प्रजापत, तरुण शौर्य, रतन चांगवाल, लीलाधर सैन, सुभाष अग्रवाल, अरुण सैन, सुनील यादव, मुकेश चांगा, शेर सिंह प्रजापत, दलीप सिकरवाल, रमेश सिकरवाल, राजकुमार शर्मा और डॉ. अश्विनी शर्मा सहित अन्य कलाकार विभिन्न भूमिकाएं निभाते हैं।
20 साल से जारी है रामलीला का मंचन
धारूहेड़ा में जय बाबा सैय्यद श्री रामलीला क्लब की ओर से भी करीब 20 साल से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। इस रामलीला में पुनीत रंगा, राहुल रंगा, रोहित सैनी, नैतिक पंडित, भूमिका, सूबे सिंह रंगा और गौरव पनवाल सहित अन्य कलाकार भाग लेते हैं। कमेटी की ओर से दशहरा पर्व पर एसएमजी ग्राउंड में रावण दहन किया जाएगा।
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धारूहेड़ा में रामलीला के आयोजनों की संख्या कम होना स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं के लिए चिंता का विषय है। रामलीला कमेटियों के सामने नई पीढ़ी को मंचन से जोड़ने और दर्शकों की रुचि बनाए रखने की चुनौती है। इसके बावजूद दोनों कमेटियां वर्षों से चली आ रही परंपरा को जारी रखे हुए हैं और दशहरा पर्व की तैयारियों में जुटी हैं।
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