चंडीगढ़ : हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने 95 कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) और सेवानिवृत्ति लाभ देने के पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट High Court में चुनौती देने की पूरी तैयारी कर ली है। राज्य सरकार के वित्त विभाग ने इस संबंध में प्रशासनिक विभागों को निर्देश जारी करते हुए 10 दिनों के भीतर एलपीए (Letters Patent Appeal – LPA) दाखिल करने के कड़े आदेश दिए हैं। इस कदम से प्रदेश के हजारों संविदा व अस्थायी कर्मचारियों की नजरें अब शीर्ष अदालत पर टिक गई हैं।
क्या था पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का फैसला?
हाई कोर्ट ने ‘ओमप्रकाश बनाम हरियाणा सरकार’ मामले के साथ-साथ 94 अन्य जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कर्मचारियों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने कर्मचारियों को दो श्रेणियों में बांटकर राहत दी थी। पहली श्रेणी में वे कर्मचारी शामिल हैं, जो 1 जनवरी, 2006 से पहले पार्ट टाइम, अस्थायी (Temporary) या अनुबंध (Contractual) आधार पर नियुक्त हुए थे और जिन्हें बाद में पक्का (नियमित) किया गया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि नियमित होने से पहले की गई अस्थायी/अनुबंध सेवा को भी पेंशन के लिए ‘क्वालिफाइंग सर्विस’ माना जाए और उसी आधार पर पेंशन व अन्य बकाए का भुगतान किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की वजह
हाई कोर्ट के इस फैसले के लागू होने से राज्य खजाने पर वित्तीय भार पड़ने की संभावना जताई जा रही है। इसी के तहत वित्त विभाग ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के निर्देश दिए हैं।यदि सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रहता है, तो हरियाणा के हजारों अन्य अस्थायी व नियमित हुए कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।










