Haryana News: हरियाणा में पशुपालकों की आय बढ़ाने की नई पहल! जानिए किन योजनाओं से मिलेगा सीधा लाभ

On: July 8, 2025 2:45 PM
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Haryana News: हरियाणा सरकार ने पशुपालकों को राहत देने के लिए अब योजनाओं का लाभ ऑनलाइन उपलब्ध कराया है। अब कोई भी पशुपालक ‘सरल पोर्टल’ के माध्यम से आवेदन कर सकता है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि गांव के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले किसान भी इन योजनाओं से जुड़ पा रहे हैं। इसके लिए जरूरी दस्तावेजों के साथ एक मोबाइल नंबर और पहचान पत्र की जरूरत होती है।

राज्य सरकार की योजनाएं विशेष रूप से उन युवाओं के लिए बनी हैं जो बेरोजगार हैं और आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है। 18 से 55 साल के पशुपालकों को 25% से 50% तक की सब्सिडी दी जा रही है ताकि वे मवेशियों की देखभाल में सुधार कर सकें और ज्यादा दुग्ध उत्पादन कर अपनी आय बढ़ा सकें। पशुपालन के साथ डेयरी खोलना अब अधिक लाभदायक बनता जा रहा है।

मुख्यमंत्री परिवार उत्थान योजना के तहत सीधे आर्थिक सहायता का प्रावधान

मुख्यमंत्री परिवार उत्थान योजना के तहत सरकार सीधे वित्तीय सहायता दे रही है। सामान्य वर्ग के पशुपालकों को 25% और अनुसूचित जाति के पशुपालकों को 50% तक की सब्सिडी मिल रही है। अगर कोई पशुपालक डेयरी यूनिट स्थापित करना चाहता है तो सरकार 50% तक का लोन सब्सिडी के रूप में देती है। यह योजना विशेष रूप से महिलाओं और छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।

भैंस खरीद पर महिलाओं को 50% सब्सिडी, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम

महिला पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार भैंस की खरीद पर 50% तक की सब्सिडी दे रही है। यह न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत कर रहा है। यह योजना ग्रामीण महिला सशक्तिकरण का अच्छा उदाहरण बन रही है। साथ ही, महिला स्वयं सहायता समूह भी इन योजनाओं से जुड़कर सामूहिक डेयरी यूनिट चला रहे हैं।

पशुपालन विभाग की योजनाओं में गैर अनुसूचित जाति के पशुपालकों के लिए 5 वर्षों की योजना के तहत 20 से 30 पशुओं तक का लोन उपलब्ध कराया जाता है। इससे किसानों को खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी व्यवसायिक रूप में अपनाने का मौका मिल रहा है। इन योजनाओं से हरियाणा की दूध उत्पादन दर में भी जबरदस्त वृद्धि हो रही है।

सुनील चौहान

सुनील चौहान हरियाणा क्षेत्र की खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में 10 साल का अनुभव है और वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।

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