गुरूवार, 5 नवम्बर 2026

Gurugram News: चिंटल पैराडिसो सोसायटी में प्रशासन की लापरवाही, असुरक्षित टावरों में रह रहे सैकड़ों लोग, जानिए पूरी खबर

Written by: सुनील कुमार

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Gurugram News: चिंटल पैराडिसो सोसायटी हादसे से संबंधित मामले में जिला प्रशासन की लापरवाही एक बार फिर चर्चा में है। जिला प्रशासन ने सर्वोच्च न्यायालय में कई सुनवाई तिथियां बीत जाने के…


Gurugram News: चिंटल पैराडिसो सोसायटी में प्रशासन की लापरवाही, असुरक्षित टावरों में रह रहे सैकड़ों लोग, जानिए पूरी खबर
Gurugram News: चिंटल पैराडिसो सोसायटी में प्रशासन की लापरवाही, असुरक्षित टावरों में रह रहे सैकड़ों लोग, जानिए पूरी खबर
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Gurugram News: चिंटल पैराडिसो सोसायटी हादसे से संबंधित मामले में जिला प्रशासन की लापरवाही एक बार फिर चर्चा में है। जिला प्रशासन ने सर्वोच्च न्यायालय में कई सुनवाई तिथियां बीत जाने के बावजूद अब तक कोई उत्तर नहीं दिया है। सरकारी कार्रवाई में देरी के कारण सोसायटी के सैकड़ों लोग असुरक्षित जीवन जी रहे हैं।

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सोसायटी में रहने वाले मनोज सिंह का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा प्रशासनिक प्रतिक्रिया में देरी है। टावर ए, बी और सी को पहले से ही असुरक्षित घोषित करने के बावजूद, लगभग ९० परिवार इन इमारतों में रह रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि सरकारी अधिकारी जिन्होंने समय रहते न्यायालय में जवाब नहीं दिया, पूरी तरह से जिम्मेदार होंगे अगर कोई जनहानि होती है।

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सोसायटी के निवासी डा. निहारिका ने कहा कि बिल्डर ने पीड़ितों को किराया भी नहीं दिया है, सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करते हुए। बिल्डर से लिखित अनुरोध किया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। दो साल बीत जाने के बावजूद, न तो सभी असुरक्षित टावरों को गिराया गया है और न ही पुनर्निर्माण शुरू हुआ है।

समुदाय के निवासियों ने बताया कि बिल्डर पुनर्निर्माण की आड़ में अधिक फ्लैट बनाने की योजना बना रहा है और निर्माण लागत एक हजार रुपये प्रति वर्गफुट वसूलना चाहता है। इसके खिलाफ परिवारों ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।

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अब तक अदालत ने चार सुनवाईओं में सरकारी पक्ष से उत्तर मांगा है। जुलाई में हुई पहली सुनवाई के दौरान मामले को अंतिम निपटारे के लिए 23 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई थी, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

अतिरिक्त उपायुक्त गुरुग्राम वत्सल वशिष्ठ ने कहा कि इस मामले में जिला नगर योजनाकार (प्रवर्तन) विभाग को सुप्रीम कोर्ट में जवाब देना चाहिए। विभाग ने अभी कोई उत्तर नहीं दिया है। इस बारे में विभाग से पता लगाया जाएगा।

सुनील कुमार
About the Author सुनील कुमार

सुनील कुमार (Best E News) हरियाणा की क्षेत्रीय खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनकी प्राथमिकता क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं, जनसमस्याओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाना है। View all posts by सुनील कुमार →

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