राजस्थान: राजस्थान विधानसभा में डिस्टर्ब एरिया बिल को ध्वनि मत के जरिए पारित कर दिया गया। शुक्रवार (6 मार्च) को देर रात तक चले विधानसभा सत्र में इस बिल को लेकर लंबी बहस हुई, जिसके बाद इसे सदन से मंजूरी मिल गई। हालांकि बिल पास होने के समय कांग्रेस के विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर लिया। कांग्रेस ने इस बिल का शुरू से ही कड़ा विरोध किया और इसे लेकर सरकार पर कई सवाल भी उठाए।
सदन में बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के विधायकों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए सरकार से इस बिल को वापस लेने की मांग की। कांग्रेस का कहना था कि इस तरह का कानून लागू करने से आम लोगों पर असर पड़ सकता है और इससे प्रशासन को अत्यधिक अधिकार मिल जाएंगे। पार्टी के नेताओं ने इसे नागरिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि ऐसे कानूनों का इस्तेमाल सावधानी से होना चाहिए।
विधानसभा में हुई बहस के दौरान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने भी इस बिल का खुलकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस बिल के खिलाफ है और यदि वर्ष 2028 में राज्य में कांग्रेस की सरकार बनती है तो इस कानून को समाप्त कर दिया जाएगा। डोटासरा ने यह भी कहा कि सरकार को ऐसे कानून बनाने से पहले सभी पक्षों की राय लेनी चाहिए और जनता के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने इस बिल का समर्थन करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और संवेदनशील क्षेत्रों में शांति बनाए रखना है। सरकार का तर्क था कि कई इलाकों में सामाजिक तनाव और विवाद की स्थिति बन जाती है, ऐसे में प्रशासन को विशेष अधिकार देने से स्थिति को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा। सरकार के अनुसार, यह कानून किसी खास समुदाय या वर्ग को निशाना बनाने के लिए नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए लाया गया है।
बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। कांग्रेस के विधायकों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह विपक्ष की चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है। वहीं, सत्ता पक्ष के नेताओं ने कहा कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को तूल दे रहा है।
लंबी चर्चा और विरोध के बाद अंततः डिस्टर्ब एरिया बिल को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। बिल पास होते ही कांग्रेस के विधायकों ने विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया। कांग्रेस का कहना है कि वह इस मुद्दे को आगे भी जनता के बीच उठाएगी और सरकार पर दबाव बनाए रखेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बिल को लेकर आने वाले समय में भी राजनीतिक बहस जारी रह सकती है। विपक्ष इसे जनता के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा, जबकि सरकार इसे कानून-व्यवस्था के लिहाज से जरूरी कदम बताकर अपना पक्ष मजबूत करने का प्रयास करेगी।
फिलहाल डिस्टर्ब एरिया बिल के पास होने के साथ ही राजस्थान की राजनीति में एक नया मुद्दा सामने आ गया है, जिस पर आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।













