Rewari में लोगों की सुविधा के लिए बनाई जा रही सड़कों के मलबे ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शहर में 55 से ज़्यादा जगहों पर सड़कें बनाई जा रही हैं। नियमों को नज़रअंदाज़ करते हुए, तोड़ी गई सड़कों का लगभग 500 टन मलबा पूरे शहर में फेंक दिया गया है, जिससे मलबे के पहाड़ बन गए हैं।
इससे न सिर्फ़ शहर की सूरत खराब हो रही है, बल्कि ज़िम्मेदार लोगों की लापरवाही भी साफ़ दिख रही है। जहाँ खुलेआम कचरा फेंकने पर लोगों पर जुर्माना लगाया जा रहा है, वहीं शहर में फेंके जा रहे मलबे के बारे में कॉन्ट्रैक्टर को नोटिस जारी करने की ज़रूरत भी नहीं बताई गई है।
गौरतलब है कि नगर निगम (Municipal Council) ने हाल ही में शहर की टूटी सड़कों को ठीक करने का टेंडर (Tenders) जारी किया था, और सड़कें तोड़ने के बाद काम भी शुरू हो गया है। लेकिन, कॉन्ट्रैक्टर ने कंक्रीट का मलबा शहर की ब्रास मार्केट (Brass Market), अनाज मंडी के पास, Sector 4, कंटेनर डिपो (Container Depot) के पास और Sector 18 में फेंक दिया है।
इस मलबे को शहर के बाहर फेंकने की ज़िम्मेदारी कॉन्ट्रैक्टर की है। इसके बावजूद, मलबा शहर की हालत खराब करता जा रहा है। इस गलत तरीके से डाले गए मलबे को लेकर लोगों में गुस्सा है। जिम्मेदार अधिकारियों को बता दिया गया है। फिलहाल, नगर परिषद (Municipal Council) के पास शहर से यह मलबा हटाने का कोई ठोस प्लान नहीं दिख रहा है।
टेंडर जारी करके मलबा हटाना होगा
अगर ऐसा ही चलता रहा तो सड़कें टूटने के बाद जगह-जगह कंक्रीट और पत्थर के मलबे के बड़े-बड़े ढेर जमा हो जाएंगे, जिन्हें साफ करना मुश्किल होगा। फिर नगर परिषद (Municipal Council) को कंक्रीट और पत्थर का मलबा हटाने के लिए टेंडर (Tenders) जारी करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इससे न सिर्फ नगर परिषद (Municipal Council) के रेवेन्यू पर बोझ पड़ेगा बल्कि जनता को भी परेशानी होगी।
कई जगहों पर मलबा इतना जमा हो गया है कि इससे न सिर्फ सड़कें ब्लॉक हो रही हैं बल्कि पूरा इलाका भी बदसूरत हो गया है। गौरतलब है कि पहले मलबा और दूसरा वेस्ट मटीरियल डालने पर लोगों पर हजारों रुपये का जुर्माना लगाया जाता था, लेकिन ठेकेदार खुलेआम पूरे शहर में मलबा डाल रहे हैं। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
रेवाड़ी के डिप्टी कमिश्नर अभिषेक मीणा (Rewari Deputy Commissioner Abhishek Meena) ने कहा कि सड़क का मलबा शहर में नहीं डालना चाहिए। नगर निगम (Municipal Council) अधिकारियों से बातचीत करके जल्द ही कोई हल निकाला जाएगा। टेंडर (Tenders) की शर्तों की भी जांच की जाएगी।













