धारूहेड़ा: औद्योगिक कस्बा स्थित राजीव गांधी स्टेडियम, (Rajiv Gandhi Stadium Dharuhera) जो कभी खेल प्रेमियों और युवाओं की प्रतिभा निखारने का केंद्र हुआ करता था, आज बदहाली का शिकार बना हुआ है। करोड़ों रुपए की लागत से करीब डेढ दशक पूर्व एक करोड की लागत से बनाया गया स्टेडियम अब जर्जर हालत में पहुंच चुका है। चारों ओर उगी झाड़ियां, टूटी बैठने की दीवारें और मैदान में फैला कूड़ा-करकट इसकी हालत बयां कर रहा है।Rewari News
पांच साल से नही है कोच: पिछले साल से इस स्टेडियम में कोच नहीं है। ऐसे में यहा पर अभ्यास करने आने वाले खिलाडी काफी निराश है। लंबे समय से स्टेडियम की देखरेख नहीं की जा रही। गंदगी के कारण मच्छरों का अड्डा बन चुका है।
यहां कभी फुटबॉल और एथलेटिक्स जैसी गतिविधियां नियमित रूप से होती थीं, लेकिन अब मैदान वीरान पड़ा है। कई साल बनाई गई बिल्डिंग भी अब जर्जर हो चुकी है। धारूहेड़ा की पूजा यादव ने राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय लेबल पर कई अवार्ड हासिल किए है। सुविधाओं के अभाव में अब स्टेडियम ही जाना ही छोड दिया है।Rewari News
यदि प्रशासन ध्यान दे तो यह स्टेडियम दोबारा धारूहेड़ा का गौरव बन सकता है। सरकार और खेल विभाग से अपील की है कि स्टेडियम की मरम्मत और साफ-सफाई के साथ-साथ खेल सुविधाओं को फिर से शुरू किया जाए, ताकि क्षेत्र के खिलाड़ी अपने सपनों को साकार कर सकें।
यश सैनी, धारूहेड़ा
पिछले साल से कोच नहीं है। नियमित 20 से खिलाडी अभ्यास के लिए जाते है। कोच के अभाव में अभ्यास नहीं हो पाता है। खिलाडियो ने स्टेडियम में नियमित कोच उपलब्ध करवाने की मांग की है ताकि खेलो को बढावा मिल सके।
हिमाशु, धारूहेड़ा
वह पिछले कई सालों से स्टेडियम में अभ्यास करने आ रहा है। यहां पर सुविधाओं का अभाव है। पीने के पानी भी व्यवस्था नहीं है। घर से ही पानी लाना पडता है। स्टेडियम में सफाई के अभाव में झाडियां उगी हुई है। Rajiv Gandhi Stadium Dharuhera)
अमन धारूहेड़ा
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स्टेडियम शहर से काफी दूर है। न ही वहां सुविधाएं है। स्टेडियम शहर के पास होना चाहिए ताकि खिलाडी आसानी से पहुच सके। जाने के लिए कोई पक्का रास्ता नही है वही आस पास लाईट का अभाव होने से सुबह सुबह भय बना रहता है।
अंकित धारूहेड़ा
धारूहेड़ा: बदहाल धारूहेड़ा का स्टेडियम













