Breaking News: औद्योगिक क्षेत्र धारूहेड़ा में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार खराब होता जा रहा है। गुरुवार सुबह शहर का औसत AQI 383 दर्ज किया गया, जो “अस्वस्थ श्रेणी” में आता है। यह स्तर सामान्य लोगों के लिए भी हानिकारक है, जबकि बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए स्थिति और भी गंभीर हो गई है।Breaking News
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खुले में कूड़ा या पत्ते न जलाएं और वाहनों का कम से कम प्रयोग करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों को सुबह-शाम मास्क पहनने, धूलभरी सड़कों पर कम समय बिताने और घरों में एयर प्यूरीफायर या प्राकृतिक वेंटिलेशन का उपयोग करने की सलाह दी है।Breaking News

ताजा आंकड़ों के अनुसार, 27 नवंबर को AQI 335, 28 नवंबर को 315, 29 नवंबर को 298 और 30 नवंबर को 382 दर्ज किया गया। यह लगातार बढ़ते प्रदूषण स्तर की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि धारूहेड़ा में प्रदूषण का मुख्य कारण औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों की धूल, बढ़ता ट्रैफिक और आसपास के इलाकों में पराली जलाने की घटनाएं हैं। बीते कुछ दिनों में हवा की रफ्तार कम होने और तापमान में गिरावट के चलते प्रदूषक कण वातावरण में ही जमे हुए हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खुले में कूड़ा या पत्ते न जलाएं और वाहनों का कम से कम प्रयोग करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों को सुबह-शाम मास्क पहनने, धूलभरी सड़कों पर कम समय बिताने और घरों में एयर प्यूरीफायर या प्राकृतिक वेंटिलेशन का उपयोग करने की सलाह दी है।Breaking News
प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने इस दिशा में कार्रवाई भी शुरू कर दी है। खरकड़ा गांव में खुले में कूड़ा जलाने की शिकायत मिलने पर पंचायत पर 50 हजार रुपये का चालान किया गया है। प्रदूषण विभाग के जूनियर इंजीनियर अजय यादव ने बताया कि क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। धारूहेड़ा का नाम इस समय हरियाणा के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हो गया है।













