Haryana News: हरियाणा के किसान की अनूठी पहल: फसल अवशेष से कर रहा मोटी कमाई, यहां जानिए कैसे

On: October 17, 2025 5:46 PM
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कर्नाल के किसान Anuj ने खेती का तरीका बदल दिया, स्टबल जलाने की बजाय बनाया बायोफ्यूल और कमाया मुनाफा

Haryana News: Karnal जिले के डबकोली गांव के प्रगतिशील किसान अनूज ने फसल अवशेष (स्टबल) को धन में बदलकर दूसरों के लिए राह बनाई है। पहले जहां उन्हें अवशेष निपटान की समस्या से जूझना पड़ता था, आज वही अनूज एक उद्यमी बन चुके हैं, जो उद्योगों के लिए बायल तैयार कर बेचकर नियमित आय अर्जित कर रहे हैं।

सतत खेती और नई तकनीक की दिशा में कदम

अनूज का मानना है कि खेती आधुनिक, लाभकारी और पर्यावरण-हितैषी होनी चाहिए। दो साल पहले उन्होंने स्टबल मैनेजमेंट मशीन का उपयोग करना शुरू किया। फसल के बचे हुए भूसे को जलाने की बजाय उन्होंने जैव ईंधन के बंडल बनाना शुरू किया।Haryana News

 

धीरे-धीरे उन्होंने पड़ोसी खेतों से भी भूसा बंडलिंग के लिए इकट्ठा करना शुरू कर दिया, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिला। अनूज कहते हैं, “मैं चाहता हूँ कि सभी किसान इस सतत खेती के तरीकों से अतिरिक्त आय अर्जित करें।”

पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक लाभ

हर सर्दी में हरियाणा के आकाश में स्टबल जलाने के धुएँ से धुंध छा जाती थी, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ जाता था। जबकि कुछ किसान अभी भी जलाना आसान मानते हैं, अनूज ने इन-सिटू और एक्स-सिटू अवशेष प्रबंधन अपनाया। इससे न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहता है बल्कि उनकी आय में भी वृद्धि हुई।

उनकी छोटी पहल अब एक लाभकारी मॉडल बन चुकी है, और अन्य किसान उनकी तकनीक सीखने के लिए उनके खेत पर आते रहते हैं। अनूज बताते हैं कि सरकारी सब्सिडी इस प्रक्रिया को अपनाने में मदद करती है।Haryana News

“किसान न केवल सब्सिडी ले सकते हैं बल्कि स्टबल प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ 1,200 रुपये भी सरकार से प्राप्त कर सकते हैं,” उन्होंने कहा।Haryana News

सरकारी प्रशंसा और जागरूकता अभियान

अनूज के प्रयासों को पहचान देते हुए हाल ही में कृषि और किसान कल्याण विभाग की टीम ने उनके कार्यस्थल का दौरा किया। डॉ. वज़ीर सिंह, उप निदेशक कृषि (DDA) ने कहा, “अनूज स्टबल प्रबंधन करके अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। अन्य किसान भी इस मॉडल को अपनाकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं।Haryana News

 

” डॉ. सिंह ने किसानों से कहा कि स्टबल को कचरे के रूप में न देखें बल्कि इसे खेतों में पड़े धन के रूप में देखें। यदि इसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह जमीन और भविष्य दोनों की सुरक्षा करेगा। इसके साथ ही जिले में स्मार्ट और सतत खेती को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं।Haryana News

सुनील चौहान

मै पिछले 6 साल से पत्रकारिता में कार्यरत हूं। हमारा मकसद जल्दी से जल्दी देश की की ताजा खबरे को आम जनता तक पहुंचाने के साथ समस्याओं को उजागर करना है।

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