गुरूवार, 5 नवम्बर 2026

हरियाणा में पहली कक्षा के दाखिले के लिए छह वर्ष की आयु अनिवार्य, नए सत्र से लागू होगा नियम

Written by: सुनील कुमार

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हरियाणा में स्कूल शिक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहा है। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि अब छह साल से कम आयु के बच्चों को पहली कक्षा…


हरियाणा में स्कूल शिक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहा है। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि अब छह साल से कम आयु के बच्चों को पहली कक्षा में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह नया नियम आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू होगा, जो 1 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। सरकार का यह निर्णय नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है, जिसमें बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रवेश की न्यूनतम आयु तय की गई है।

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शिक्षा विभाग के अनुसार, अब किसी भी बच्चे को पहली कक्षा में प्रवेश तभी मिलेगा जब उसकी आयु कम से कम छह वर्ष पूरी हो चुकी हो। इससे पहले कई स्कूलों में पांच या साढ़े पांच साल की आयु में भी बच्चों को पहली कक्षा में दाखिला मिल जाता था, लेकिन नई नीति के लागू होने के बाद यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। सरकार का मानना है कि कम उम्र में बच्चों पर पढ़ाई का दबाव डालना उनके विकास के लिए उचित नहीं होता, इसलिए यह बदलाव आवश्यक है।

 बच्चों और अभिभावकों को कुछ राहत 

Six Years Minimum Age Mandatory for Class 1 Admission in Haryana, New Rule to Take Effect from Upcoming Academic Sessionहरियाणा निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा के अधिकार अधिनियम-2011 के नियम 10 के तहत प्रवेश के लिए छह महीने की विस्तारित अवधि का प्रावधान रखा गया है। इसका मतलब है कि यदि किसी बच्चे की आयु 1 अप्रैल तक छह वर्ष नहीं होती, लेकिन वह अगले छह महीनों के भीतर यानी अक्टूबर तक छह वर्ष का हो जाता है, तो वह उसी समय पहली कक्षा में प्रवेश लेने का पात्र होगा। इससे उन बच्चों को मौका मिलेगा जो थोड़े अंतर से आयु सीमा से बाहर रह जाते हैं।

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 नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत देशभर में स्कूल शिक्षा की  कई बदलाव 

इसी के तहत 5+3+3+4 की नई शैक्षणिक संरचना लागू की गई है, जिसमें प्रारंभिक शिक्षा के चरण को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया है। इस ढांचे के अनुसार, बच्चों की शुरुआती शिक्षा खेल आधारित और गतिविधि आधारित होनी चाहिए, ताकि वे पढ़ाई को बोझ नहीं बल्कि सीखने की प्रक्रिया के रूप में लें।

हरियाणा में इस नियम को चरणबद्ध तरीके से लागू 

पिछले शैक्षणिक सत्र में साढ़े पांच वर्ष की आयु पूरी कर चुके बच्चों को पहली कक्षा में दाखिला दिया गया था। उससे पहले के वर्षों में पांच वर्ष के बच्चों को भी प्रवेश मिल जाता था। अब नए सत्र से यह प्रक्रिया पूरी तरह से बदल जाएगी और छह वर्ष की आयु को अंतिम मानक के रूप में लागू किया जाएगा।

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शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय बच्चों के समग्र विकास के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। सही उम्र में स्कूल शुरू करने से बच्चे मानसिक रूप से अधिक तैयार रहते हैं और उनकी सीखने की क्षमता भी बेहतर होती है। साथ ही इससे शिक्षा प्रणाली में एक समानता भी आएगी, क्योंकि सभी स्कूलों में एक ही आयु मानक लागू होगा।

सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। वहीं अभिभावकों को भी अब अपने बच्चों के दाखिले की योजना नई आयु सीमा को ध्यान में रखते हुए बनानी होगी।

सुनील कुमार
About the Author सुनील कुमार

सुनील कुमार (Best E News) हरियाणा की क्षेत्रीय खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वे सामाजिक, प्रशासनिक और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। उनकी प्राथमिकता क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं, जनसमस्याओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को पाठकों तक पहुंचाना है। View all posts by सुनील कुमार →

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