धारूहेड़ा : प्राचीन शिव मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ में शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड उमड़ी। कथा व्यास भारत भूषण ने भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं और उनकी अलौकिक महिमा सुनाई। कथा वाचक ने श्रद्धालुओं को भक्ति मार्ग पर चलने का संदेश दिया। इस मौके पर झांकी भी निकाली गई।
कथा के दौरान पूरा पंडाल ‘जय श्री कृष्णा’ और ‘राधे-राधे’ के भजनों व जयकारों से गुंजायमान रहा। श्रीमद्भागवत महापुराण केवल एक कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला मार्गदर्शक ग्रंथ है। जब-जब धरती पर अधर्म और अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान श्री कृष्ण ने अवतार लेकर भक्तों की रक्षा की है और सत्य व धर्म की स्थापना की है।
श्रीमद्भागवत कथा हमें सिखाती है कि मनुष्य को बिना किसी स्वार्थ के अपना कर्म करना चाहिए। आयोजक डॉ. अश्विनी ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा रोजाना दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे होगी। कथा के समापन 8 सितंबर को हवन व भंडारे का आयोजन होगा।













