Haryana News: हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों को मिलने वाले लोन और अग्रिम राशि की मंजूरी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब इस प्रक्रिया का अधिकार डीडीओ (ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) के पास नहीं रहेगा। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी लोन और अग्रिम राशि के मामले मुख्यालय से सीधे विभागाध्यक्ष द्वारा मंजूर किए जाएंगे।
बदलाव की वजह
सरकार के अनुसार, पुराने नियमों में कई बार अधूरे दस्तावेज और अपूर्ण आवेदन भेजे जा रहे थे। इससे समय पर लोन या अग्रिम राशि का निपटारा नहीं हो पा रहा था। नई प्रक्रिया में अब हर आवेदन की मुख्यालय स्तर पर बारीकी से जांच होगी, ताकि कोई त्रुटि न रह सके।
नए नियम लागू
मुख्यालय से लोन मंजूरी मिलने के बाद ही राशि कर्मचारी को दी जाएगी। अब डीडीओ की शक्ति समाप्त कर दी गई है। सभी आवेदन मंडल कार्यालय के माध्यम से भेजे जाएंगे और आवेदन के साथ सिफारिश पत्र भी अनिवार्य होगा।
निलंबित कर्मचारी, जिन पर कार्रवाई लंबित है या जिनको सेवा से हटाने या अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की प्रक्रिया चल रही है, उनके लोन आवेदन अब स्वीकृत नहीं होंगे।
कर्मचारियों को मकान बनाने, मरम्मत, शादी, गाड़ी या कंप्यूटर खरीदने के लिए लोन मिलते हैं। अब जनस्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में सभी अधिकारियों को सख्त गाइडलाइन भेज दी है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि मुख्यालय पर कर्मचारी संघ के दबाव को ध्यान में रखते हुए नियम सख्त किए गए हैं।
आवेदन प्रक्रिया
सभी लोन और अग्रिम राशि मामलों को डीडीओ सिफारिश पत्र के साथ मंडल कार्यालय भेजेंगे। मंडल स्तर पर सत्यापन के बाद ही फाइल मुख्यालय पहुंचेगी। इसका उद्देश्य है कि हर आवेदन पारदर्शी और समय पर निपटाया जा सके।













