पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने Haryana CET 2025 में लागू नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका हाल ही में हुई CET परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को लेकर दायर की गई थी। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने इसे प्रीमेच्योर बताते हुए अदालत से याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया था।
अदालत का निर्णय और कारण
जस्टिस संदीप मौदगिल की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि आयोग के पास नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला अपनाने का पूरा अधिकार और लचीलापन है। कोर्ट ने यह भी बताया कि CET 2022 का परिणाम भी इसी फॉर्मूले के तहत घोषित किया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला केवल मूल्यांकन की सक्षम प्रक्रिया है और इसका वास्तविक प्रभाव रिजल्ट घोषित होने के बाद ही देखा जा सकता है।
याचिका का काल्पनिक स्वरूप
खंडपीठ ने कहा कि इस स्तर पर याचिका केवल काल्पनिक और पूर्व-निर्धारित स्वरूप की है। जब तक CET 2025 का वास्तविक परिणाम घोषित नहीं होता और याचिकाकर्ता ठोस पूर्वाग्रह साबित नहीं करता, तब तक कोई वैध वाद-कारण उत्पन्न नहीं होता। आयोग के पास किसी भी उपयुक्त सामान्यीकरण पद्धति को अपनाने की स्वतंत्रता है।
न्यायिक समीक्षा का दृष्टिकोण
अदालत ने यह भी कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में तकनीकी प्रक्रियाओं की न्यायिक समीक्षा बहुत सावधानी से की जानी चाहिए। किसी भी दखलअंदाजी के लिए मनमानी, दुर्भावना या स्पष्ट अवैधता का होना जरूरी है, जो इस स्तर पर साबित नहीं हुई।
इन सभी बातों को देखते हुए अदालत ने याचिका को अपरिपक्व माना और इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। याचिकाकर्ता को नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला लागू होने के बाद ही अपनी आपत्ति दर्ज करने का अधिकार रहेगा।













