Haryana सरकार ने बाढ़ और जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत देने के लिए विशेष प्राथमिकताएं तय की हैं। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि सरकार हालात की लगातार निगरानी कर रही है। इसके लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला गया है, जिस पर किसान अपनी हानि का पंजीकरण कर रहे हैं।
किसानों का पंजीकरण
अब तक प्रदेश के 2897 गांवों के 1,69,738 किसानों ने अपनी 9,96,701 एकड़ भूमि का पंजीकरण पोर्टल पर करवाया है। इन सभी क्षेत्रों में लगातार राहत कार्य चल रहा है। जिलों को आरक्षित निधि के रूप में करोड़ों की सहायता राशि स्वीकृत की गई है, ताकि तत्काल मदद पहुंचाई जा सके।
फसलों और मकानों का मुआवजा
बाढ़ से प्रभावित फसलों के नुकसान पर किसानों को प्रति एकड़ 15,000 रुपये तक मुआवजा मिलेगा। जलभराव से मकान गिरने या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने पर भी सर्वे के आधार पर भरपाई की जाएगी। वहीं जिन परिवारों को घर छोड़ना पड़ा है, उनके लिए राहत शिविर लगाए जाएंगे।
चारे और पशुओं की मदद
जहां हरे चारे की कमी है, वहां सरकार सुखा चारा उपलब्ध करवाएगी। मवेशियों की हानि पर भी मुआवजे का प्रावधान है। जैसे गाय, भैंस, ऊंटनी की मृत्यु पर 37,500 रुपये और भेड़, बकरी, सूअर पर 4,000 रुपये मिलेंगे। दूध न देने वाले पशुओं पर भी विशेष राहत दी जाएगी।
सहायता राशि का विवरण
मृत्यु पर – 4 लाख रुपये
अंग हानि (40–60%) – 74,000 रुपये
अंग हानि (60% से अधिक) – 2.50 लाख रुपये
क्षतिग्रस्त मकान (मैदानी क्षेत्र) – 1.20 लाख रुपये
क्षतिग्रस्त मकान (पहाड़ी क्षेत्र) – 1.30 लाख रुपये
आंशिक क्षति (पक्का मकान) – 10,000 रुपये
आंशिक क्षति (कच्चा मकान) – 5,000 रुपये
दुकान / उद्योग की 100% हानि – 1 लाख रुपये या वास्तविक हानि
व्यावसायिक हानि – 1.75 से 3.05 लाख रुपये
फसल हानि सब्सिडी – प्रति एकड़ 7,000 से 15,000 रुपये
मुर्गी पालन – 10,000 रुपये तक













