Haryana News: हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा का परिणाम 10 नवंबर को घोषित हुआ। लेकिन इस परिणाम को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के बाद पास होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या अचानक कैसे बढ़कर 47,378 हो गई जबकि पहले 25-26 अगस्त को 46,094 अभ्यर्थियों को वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया था।
परिणाम में देरी और बढ़ी संख्या का कारण
बोर्ड चेयरमैन प्रो. डॉ. पवन कुमार ने बताया कि कुछ अभ्यर्थियों के हल्के डार्क निशान को लेकर उन्हें ‘बेनिफिट ऑफ डाउट’ दिया गया। इससे पास होने वालों की संख्या बढ़ गई। परिणाम में देरी का मुख्य कारण चौथी फर्म से ऑडिट करवाना और बोर्ड सचिव के तबादले के चलते नई जिम्मेदारियों से जुड़ी परेशानियां थीं। कुल मिलाकर 3,35,076 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे।
ओएमआर सीट आवेदन प्रक्रिया में उलझन
इस बार ओएमआर सीट के लिए आवेदन करने का समय मात्र नौ दिन था जबकि पहले 60 दिन मिलते थे। आवेदन के लिए एक ई-मेल आईडी जारी की गई थी। अभ्यर्थियों को आवेदन के बाद गेट-वे पेमेंट का लिंक भेजा गया। इससे पहले आवेदन सीधे किए जाते थे। परिणाम देर से घोषित होने की वजह से यह समय कम रखा गया।
बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की नई प्रक्रिया
पहले 46 हजार अभ्यर्थियों को वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया था जिसमें लगभग 40 हजार पहुंचे। जिन अभ्यर्थी पास हुए हैं, उन्हें फिर से नोटिफिकेशन जारी कर वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस न होने का कारण
परिणाम की घोषणा चोरी-छुपे करने का आरोप गलत है। फर्म ने परिणाम देरी से देने की वजह से बोर्ड को तुरंत सूचना नहीं दी। जब परिणाम तैयार हुआ तो कुछ पत्रकारों के सामने परिणाम घोषित कर वेबसाइट पर वीडियो अपलोड किया गया।













