Haryana Weather: हरियाणा समेत अंबाला में मौसम धीरे-धीरे बदल रहा है। दिन में हल्की धूप तो रहती है, लेकिन रात में बढ़ती ठंड ने लोगों को मौसम के बदलाव का एहसास करा दिया है। हरियाणा में पिछले पाँच दिनों से न्यूनतम तापमान लगातार गिरावट पर है, जबकि उत्तर-पश्चिमी हवाएँ ठंड बढ़ाने में योगदान दे रही हैं। सूर्य की गर्मी के कारण अधिकतम तापमान अभी भी 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है।
पिछले पाँच दिनों में हरियाणा का तापमान 11 अक्टूबर को 17.1 डिग्री, 12 अक्टूबर को 16.9 डिग्री, 13 अक्टूबर को 16.4 डिग्री, 14 अक्टूबर को 15.7 डिग्री और 15 अक्टूबर को 15.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन और रात के तापमान में अंतर लगभग दोगुना हो गया है। हरियाणा मौसम विभाग (IMD) के विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे यह अंतर घटेगा, ठंड में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। फिलहाल दिन का अधिकतम तापमान लगभग 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास स्थिर है।
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट आएगी। दीवाली तक मौसम शुष्क रहने की संभावना है। यदि अक्टूबर के अंत तक सूखा मौसम और उत्तर-पश्चिमी हवाएँ जारी रहीं, तो न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है।
पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश का प्रभाव अब भी देखा जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, इस बार तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है क्योंकि अक्टूबर के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश हुई थी। पश्चिमी विक्षोभ के कारण हरियाणा में लगभग 30 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्यतः इस अवधि में केवल 4 मिमी वर्षा होती है। इस बार यह 64.9 प्रतिशत अधिक रही, जिससे तापमान सामान्य से नीचे चला गया और ठंड बढ़ने लगी।
पहाड़ों पर बर्फबारी के बाद हरियाणा के मैदानी इलाकों में रात का तापमान लगातार गिर रहा है। उत्तर-पश्चिमी हवाओं के चलते गुरुग्राम और हिसार में न्यूनतम तापमान सबसे कम दर्ज किया गया, जिससे सर्दी का अहसास बढ़ गया। मौसम विभाग के अनुसार, हिसार और नारनौल में न्यूनतम तापमान 15.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.5 डिग्री कम है। वहीं, पलवल में अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री और रोहतक में 28.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से लगभग 5 डिग्री कम है।
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के आगे बढ़ने के कारण 17 अक्टूबर तक मौसम सामान्यतः शुष्क रहेगा। दिन में धूप और रात में ठंडक वाला यह मौसम सरसों की बुवाई के लिए अनुकूल है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे इस सीजन में सरसों की अच्छी किस्मों की बुवाई करें ताकि बेहतर पैदावार प्राप्त हो सके।













