Shriram Katha : धारूहेड़ा: नंदरामपुर बास रोड स्थित गायत्री मंदिर के निकट आयोजित श्रीराम कथा में (Shriram Katha) शनिवार को यज्ञोपवीत संस्कार और शुभ मुहूर्त की महत्ता को लेकर विशेष मंचन किया गया। भागवत सेवा समिति धारूहेड़ा और लड्डू गोपाल परिवार के संयुक्त तत्वावधान में चल रही इस कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। Shriram Katha
धार्मिक आयोजन के दौरान पारंपरिक मंचन के माध्यम से बताया गया कि सनातन परंपरा में यज्ञोपवीत धारण केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि जीवन को संस्कार, अनुशासन और ज्ञान की दिशा में आगे बढ़ाने का माध्यम है। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की उपस्थिति से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। Shriram Katha
कथा वाचक गोपालाचार्य महाराज ने यज्ञोपवीत संस्कार के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यज्ञोपवीत धारण व्यक्ति को द्विज बनने का बोध कराता है, जिसका अर्थ है ज्ञान और संस्कार के साथ नए जीवन की शुरुआत। यह संस्कार व्यक्ति को ऋषि ऋण, देव ऋण और पितृ ऋण की स्मृति कराता है, जिससे उसका आचरण शुद्ध होता है













