पुराने Gurugram को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने के प्लान में एक बड़ा बदलाव किया गया है। गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) ने एक स्टडी करने के बाद, मेट्रो स्टेशनों (metro stations) के दूसरे फेज़ को अंडरग्राउंड के बजाय एलिवेटेड बनाने का फैसला किया है। इसके पीछे मुख्य कारण लागत और समय की बचत है। GMRL जल्द ही इस फैसले पर शहरी विकास और आवास मंत्रालय (Ministry of Urban Development and Housing) को पूरी रिपोर्ट देगी।
अधिकारियों के मुताबिक, 31.5 km लंबे मेट्रो प्रोजेक्ट के पहले फेज़ के 15.3 km के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं, और काम शुरू भी हो चुका है। अगले 30 दिनों में दूसरे फेज़ के लिए भी टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। अंडरग्राउंड कंस्ट्रक्शन से लागत लगभग दोगुनी हो जाती, और स्टेशन बनाने के लिए सड़कें खोदने से लंबे समय तक ट्रैफिक जाम लगता।
नई DPR और जियोटेक्निकल सर्वे (geotechnical survey) में लगभग दो साल लगते, जिससे पूरे प्रोजेक्ट में देरी होना तय था। इसे देखते हुए, GMRL ने अंडरग्राउंड मॉडल की स्टडी की, लेकिन फीजिबिलिटी और टाइम-कॉस्ट एनालिसिस (time-cost analysis) के आधार पर, उसे एलिवेटेड मॉडल ज्यादा सही लगा। दूसरे फेज में सेक्टर 7, 4, 5, रेलवे स्टेशन, अशोक विहार, सेक्टर 3, बजघेड़ा रोड (Bajghera Road), पालम विहार एक्सटेंशन (Palam Vihar Extension), पालम विहार (Palam Vihar), सेक्टर 23A, उद्योग विहार फेज 4-5 (Udyog Vihar Phases 4-5) और DLF साइबर सिटी (DLF Cyber City) में स्टेशन बनाए जाएंगे।
जनवरी में मेट्रो के पिलर दिखने लगेंगे
GMRL अधिकारियों ने बताया कि जनवरी में पिलर दिखने लगेंगे। महीने के आखिर तक 35 पिलर तैयार होने की उम्मीद है। सेक्टर 33 में कास्टिंग यार्ड में U-गर्डर बनाने का काम तेज कर दिया गया है। पुराने गुरुग्राम मेट्रो को तय समय से पहले पूरा करने का लक्ष्य है। कंस्ट्रक्शन के दौरान ड्राइवरों को परेशानी न हो, इसके लिए ट्रैफिक पुलिस और एक्सपर्ट मिलकर डायवर्जन प्लान बनाएंगे। ट्रैफिक मार्शल भी तैनात किए जाएंगे। एजेंसी को जरूरी गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं।













