भारतीय रेलवे ने एक नई और अभूतपूर्व पहल करते हुए भारत की पहली Hydrogen Train तैयार कर ली है। यह ट्रेन सितंबर 2025 में हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर के रूट पर ट्रायल रन के लिए तैयार है। इसे चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में निर्मित किया गया है और यह पूरी तरह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है। इसे भारतीय रेलवे की एक पर्यावरण के अनुकूल और टेक्नोलॉजी में मील का पत्थर माना जा रहा है।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाकर बिजली उत्पन्न की जाती है। इस प्रक्रिया में केवल पानी और भाप का उपयोग होता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन बिल्कुल शून्य रहता है। इस ट्रेन के कारण प्रदूषण और धुएं से होने वाला नुकसान नहीं होगा, जिससे यह डीज़ल ट्रेनों की तुलना में पूरी तरह स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त साबित होती है।
यह ट्रेन 1,200 हॉर्सपावर की क्षमता रखती है, जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक बनाती है। अन्य देशों की हाइड्रोजन ट्रेनों की क्षमता आम तौर पर 500-600 हॉर्सपावर होती है। ट्रेन में 8 पैसेंजर कोच और 2 हाइड्रोजन स्टोरेज कोच हैं, जो एक बार में 2,638 यात्रियों को ले जाने में सक्षम हैं। यह 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है और 1 किलो हाइड्रोजन 4.5 लीटर डीज़ल के बराबर माइलेज देती है।
इस ट्रेन का निर्माण ICF, चेन्नई में हुआ है और इसे लखनऊ स्थित रिसर्च, डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) ने डिजाइन किया है। यह पूरी तरह देशी तकनीक पर आधारित है। ट्रेन की अनुमानित लागत 82 करोड़ रुपये है और भारतीय रेलवे ने 35 ऐसी ट्रेनों के निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 2,800 करोड़ रुपये और 600 करोड़ रुपये अलग से आवंटित किए हैं। यह ट्रेन डीज़ल इंजनों की तुलना में 60% कम शोर करती है और भारत को जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला पांचवां देश बना देगी। यह न केवल सबसे लंबी बल्कि सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन भी साबित होगी।













