Haryana: हरियाणा में शहरी निकायों की सरकारी संपत्तियों जैसे खाली जमीनें और भवनों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इसके लिए “म्युनिसिपल एसेट्स मैनेजमेंट पोर्टल” तैयार किया गया है। इस अभियान में गुरुग्राम नगर निगम सबसे आगे चल रहा है। यहां अब तक 262 संपत्तियों की एंट्री की जा चुकी है जो पूरे राज्य में सबसे ज्यादा है। राज्य भर में अब तक कुल 971 संपत्तियों की एंट्री हुई है। हालांकि इनमें से किसी पर भी अभी नगर आयुक्त या उपनगर आयुक्त की मंजूरी नहीं मिली है। अधिकारियों का कहना है कि अगली प्रक्रिया में इन सभी प्रविष्टियों की स्वीकृति का काम शुरू किया जाएगा।
गुरुग्राम के मानेसर क्षेत्र में 139 प्रविष्टियाँ की गई हैं जिनमें GIS पर अंकन नहीं हुआ है और यह संख्या भी राज्य में सबसे अधिक है। दूसरी ओर, फरीदाबाद, पानीपत और बहादुरगढ़ जैसे बड़े शहरों में अभी तक सरकारी संपत्तियों की या तो कोई एंट्री नहीं हुई है या बहुत कम संख्या में हुई है। वहीं नूंह जिले के फिरोजपुर झिरका में 51 और पुन्हाना में 47 संपत्तियों की जानकारी पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी है। रेवाड़ी जिले के धारूहेड़ा ने 24 और जींद ने 10 संपत्तियों की एंट्री की है। यह दिखाता है कि छोटे कस्बों ने भी इस डिजिटल मुहिम में अच्छी भागीदारी दिखाई है।
अब सड़कों को भी मिलेगी यूनिक पहचान
अब सड़कों को भी यूनिक आईडी दी जाएगी। इसके साथ ही अंडरग्राउंड सीवरेज, पेयजल पाइपलाइन और अन्य यूटिलिटी नेटवर्क का सर्वे भी “ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार” तकनीक से किया जाएगा। गुरुग्राम समेत राज्य के अन्य शहरों में सड़कों और उनसे जुड़ी यूटिलिटी लाइनों का कोई डिजिटल रिकॉर्ड नहीं है। इसी के चलते जब नई सड़कें बनती हैं या पुरानी मरम्मत होती हैं तो सीवरेज और पानी की लाइनों को नुकसान पहुंचता है और दोबारा खुदाई में खर्च बढ़ता है। अब हर सड़क और उससे जुड़ी लाइन का डिजिटल नक्शा बनेगा जिससे भविष्य में निर्माण कार्य के दौरान समस्याएं नहीं आएंगी।
डिजिटल रिकॉर्ड से मिलेगी पारदर्शिता और सुविधा
अधिकारियों का कहना है कि जब हर संपत्ति को यूनिक आईडी दी जाएगी तो उसकी निर्माण तिथि, मरम्मत इतिहास और उससे जुड़ी यूटिलिटी की पूरी जानकारी एक जगह उपलब्ध होगी। इससे किसी भी निर्माण या मरम्मत से पहले सभी विभाग आपस में समन्वय कर पाएंगे। इससे अनावश्यक खर्च, समय की बर्बादी और जन असुविधा से बचा जा सकेगा। गुरुग्राम में संपत्तियों का अधिकतम डेटा अब पोर्टल पर मौजूद है और यह पूरे राज्य में डिजिटल ट्रैकिंग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।













