Haryana News: हरियाणा में निजी स्कूलों के खेल नर्सरी ना मिलने से वहां अभ्यास कर रहे युवा खिलाड़ियों के बीच निराशा और मायूसी की स्थिति बन गई है। निजी स्कूल संघ ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और खेल मंत्री गौरव गौतम से हस्तक्षेप की मांग की है। संघ का कहना है कि खिलाड़ियों के भविष्य और खेल को बढ़ावा देने के लिए निजी स्कूलों को भी खेल नर्सरी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
प्रदेश के निजी स्कूल संघ के अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने बताया कि खेल विभाग की तरफ से मार्च महीने में खेल नर्सरी के लिए आवेदन मांगे गए थे। इसके तहत प्रदेशभर के हजारों निजी, सरकारी और पंचायत स्कूलों ने खेल नर्सरी के लिए आवेदन किया। इसके बाद जिला स्तर पर नर्सरी की जांच की गई और योग्य नर्सरियों की सूची खेल विभाग के मुख्यालय, पंचकूला में डायरेक्टर के पास भेजी गई।
कुंडू ने कहा कि सरकारी और पंचायत स्कूलों को तो कुल 868 खेल नर्सरी आवंटित कर दी गईं, लेकिन छह माह बीतने के बाद भी निजी स्कूलों को एक भी खेल नर्सरी नहीं दी गई। जबकि इस बार सरकार ने कुल 2000 खेल नर्सरी देने का वायदा किया था। उन्होंने बताया कि प्रत्येक खेल नर्सरी में 25 खिलाड़ी शामिल होते हैं और खेल विभाग युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि देता है। 8 से 14 वर्ष के बच्चों को 1500 रुपए प्रति माह और 15 से 19 वर्ष के बच्चों को 2000 रुपए प्रति माह डाइट मनी दी जाती है।
इस बार सरकार ने घोषणा की है कि डाइट मनी बढ़ाकर 8 से 14 वर्ष के बच्चों को 2000 रुपए और 15 से 19 वर्ष के बच्चों को 2500 रुपए प्रति माह दी जाएगी। सत्यवान कुंडू ने अनुरोध किया कि निजी स्कूलों को भी खेल नर्सरी प्रदान की जाए ताकि यहां के खिलाड़ी निरंतर अभ्यास कर सकें और राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। इस कदम से खेल के क्षेत्र में प्रतिभाओं को पहचान और प्रोत्साहन मिलेगा।













