Haryana News: हरियाणा सरकार प्रदेश के कल्याण और विकास के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी कड़ी में अब सरकार ने सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, दफ्तरों और गोदामों की छतों पर सोलर पैनल सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य हरियाणा को ग्रीन एनर्जी यानी हरित ऊर्जा का राष्ट्रीय मॉडल बनाना है। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने कर्मचारियों और नियमित बिजली बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं के लिए नई ‘सौर ऊर्जा प्रोत्साहन योजना’ लागू करने की तैयारी भी शुरू कर दी है। यह योजना अब मंजूरी के लिए सरकार के समक्ष प्रस्तुत की गई है।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने हाल ही में बजट घोषणाओं की समीक्षा की और पीएम सूर्य घर मुक्त बिजली योजना की प्रगति पर भी रिपोर्ट ली। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत हर घर तक रूफटॉप सोलर योजना का लाभ पहुंचना चाहिए। इसके लिए उन्होंने हर जिले में प्रभावी परिणाम प्राप्त करने के निर्देश दिए ताकि शहरों और कस्बों में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा का विकास हो सके।
वर्तमान में हरियाणा में 42,286 रूफटॉप सोलर यूनिट्स लगाई जा चुकी हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि यह संख्या 31 मार्च 2027 तक बढ़कर 2,22,000 हो जाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि ऊर्जा सुरक्षा राज्य के आर्थिक विकास की रीढ़ है और इसलिए सभी लंबित ऊर्जा परियोजनाओं को समय सीमा के अंदर पूरा करना अनिवार्य है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, अगले सात वर्षों में हरियाणा में बिजली उत्पादन क्षमता में 24,000 मेगावाट की वृद्धि करना लक्ष्य है। इससे पूरे राज्य के हर उपभोक्ता को 100 प्रतिशत निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। इस योजना से न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा बल्कि ऊर्जा की बचत और लागत में भी कमी आएगी।
इस तरह हरियाणा सरकार सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े कदम उठा रही है और राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे ले जा रही है। यह प्रयास प्रदेश के सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।













