Haryana News: हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) के ग्रुप-सी भर्ती मामले में हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई एक बार फिर टल गई है। आयोग द्वारा 24 ग्रुपों के संबंध में दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सरकार ने अपना पक्ष रखा लेकिन कोर्ट में कई सवाल उठ गए। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सरकार के रुख पर गंभीर आपत्ति जताई और तर्क दिया कि परिणाम घोषित करने में प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता नहीं रही।
एडवोकेट जनरल प्रविंद्र चौहान ने कोर्ट के सामने कुछ स्पष्टीकरण दिए, लेकिन बाद में स्थिति को और स्पष्ट करने के लिए एक बेहतर हलफनामा दाखिल करने का समय मांगा। खंडपीठ ने उनकी मांग को स्वीकार किया और अगली सुनवाई की तारीख 26 सितंबर 2025 तय कर दी।
पिछली सुनवाई के दौरान भी सरकार ने यह दावा किया था कि जारी किए गए परिणाम सीईटी-1 (CET-1) के अंकों के आधार पर निकाले गए हैं। उस समय भी वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सरकार के इस स्टैंड पर सवाल उठाए थे और कोर्ट ने शपथपत्र दाखिल करने के आदेश दिए थे।
वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एस. खोसला, अक्षय भान और अधिवक्ता माधव गुप्ता ने यह दलील दी कि सरकार का यह कहना गलत है कि सीईटी-2 का परिणाम सामाजिक-आर्थिक मानदंडों के अंक जोड़े बिना ही निकाला गया। इस पर कोर्ट ने भी गंभीरता दिखाई और स्पष्ट हलफनामा दाखिल करने का एक और मौका दिया।
अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी। तब यह तय होगा कि सरकार के तर्क सही हैं या फिर याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां भारी पड़ती हैं। इस मामले पर प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हुई हैं क्योंकि फैसला सीधे भर्ती प्रक्रिया और मेरिट लिस्ट को प्रभावित करेगा।













