Haryana News: चंडीगढ़ की सड़कों से 2026 के अंत तक डीजल बसें पूरी तरह हट जाएंगी। उनकी जगह केवल विद्युत चालित बसें चलेंगी। राज्य परिवहन विभाग कुल 500 विद्युत बसों का बेड़ा तैयार कर रहा है। सीटीयू के परिवहन निदेशक प्रद्युमन सिंह के अनुसार अगले तीन से चार महीनों में लगभग 100 नई विद्युत बसें शुरू होंगी। इसके बाद निविदा प्रक्रिया के माध्यम से 300 और बसें लाई जाएंगी। वर्ष 2026 तक विद्युत बसों की कुल संख्या लगभग 500 तक पहुंच जाएगी।
वर्तमान में चंडीगढ़ परिवहन उपक्रम (सीटीयू) लगभग 40 विद्युत बसें चला रहा है। ये बसें फेम भारत योजना के तहत कंपनियों से किराये पर ली गई हैं। इन बसों का संचालन सकल लागत अनुबंध प्रणाली के तहत होता है, यानी वाहन चलाने, ऊर्जा भरने और रख-रखाव की पूरी जिम्मेदारी संचालक कंपनी की होती है। भुगतान प्रति किलोमीटर तय दर पर किया जाता है।
हाल ही में सेक्टर-17 परेड मैदान के पास एक विद्युत बस पलट गई थी। घटना के कारण सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। कैमरों की जांच में पता चला कि चालक ने तेज रफ्तार और लापरवाही से बस चलाई।
इस घटना के बाद परिवहन विभाग ने सुरक्षा सुधार और रोकथाम के उपायों के लिए विशेष समिति बनाई। प्रद्युमन सिंह ने बताया कि अब सभी विद्युत बस चालकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में सुरक्षित संचालन, गति नियंत्रण, ब्रेक का सही उपयोग और यात्रियों की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक बस में पांच उच्च गुणवत्ता वाले सुरक्षा कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे बस के आगे, पीछे, चढ़ने-उतरने के द्वारों और मुख्य डिब्बे के भीतर लगाए जाएंगे। कैमरों का सीधा लिंक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से जुड़ा रहेगा, जिससे अधिकारी बस के संचालन की निगरानी कर सकेंगे। इस व्यवस्था से न केवल लापरवाह ड्राइविंग पर रोक लगेगी बल्कि चोरी, छेड़छाड़ और यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाओं से भी सुरक्षा मिलेगी।
चंडीगढ़ परिवहन उपक्रम इस समय 50 से अधिक नगर मार्गों और लगभग 20 उपनगरीय मार्गों पर सेवाएँ दे रहा है। यह चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला को जोड़ते हुए आवासीय क्षेत्रों, औद्योगिक इलाकों और नज़दीकी कस्बों तक आसान आवाजाही सुनिश्चित करता है।













