Haryana News: जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों को कड़ाके की ठंड और धुंध के बीच खुले में गतिविधियां कराई जा रही हैं। शिक्षा विभाग से स्पष्ट आदेशों के बावजूद कक्षाओं में ठंड से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं और आधारभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। ठिठुरते बच्चों का कांपता शरीर व्यवस्था की दुर्दशा का गवाह है। वीरवार को स्कूलों की जांच करने पर चौंकाने वाली जानकारी मिली।
जिले के 98 प्राइमरी और 52 अपर प्राइमरी स्कूलों में खिड़कियां, दरवाजे और रोशनदान टूटे पड़े हैं। कई स्कूलों में सर्द हवाएं बच्चों के स्वास्थ्य को खराब करती हैं क्योंकि खिड़कियों के शीशे और जालियां नहीं हैं। हालाँकि, कई स्कूलों की छतों और फर्श टूट गए हैं। अब भी खुले स्थानों पर सुबह की प्रार्थना की जाती है, जहां ठंड में जमीन पर बैठे बच्चे ठिठुर रहे हैं। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए मुख्यालय से लगभग 22 करोड़ रुपये के बजट की मांग की गई है, लेकिन परिस्थितियां अभी भी बदतर हैं।
मॉडल संस्कृति की शिक्षा संस्था: खुले में बैठकर कराई जाती हैं
शीतकालीन मौसम के बावजूद वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शहर की मॉडल संस्कृति से प्रेरित बच्चों ने खुले में खेल खेले। बच्चों को प्रार्थना के बाद लगभग आधा घंटे तक सह-शिक्षा कार्यक्रमों में जमीन पर बैठना पड़ता है। पहली से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को ठंड लगती है। विद्यालय में लगभग 650 विद्यार्थी हैं, लेकिन इसके खुले और हवादार कमरे ठंड से राहत नहीं देते हैं।
मानान मिलना: सरकारी प्राथमिक पाठशाला में ठिठुरता
मानान पाना शहर में राजकीय प्राथमिक संस्कृति मॉडल पाठशाला में लगभग 350 विद्यार्थी पढ़ते हैं, जो कक्षा पहली से पांचवीं तक पढ़ते हैं। दो अन्य सरकारी प्राथमिक स्कूल भी इसी भवन में चल रहे हैं। तीन स्कूल एक ही छत के नीचे चलने से स्थिति और खराब हो गई है। बच्चों को सर्द हवाएं सीधे छू रही हैं क्योंकि सभी कमरों की खिड़कियों के शीशे टूटे हैं। कई बच्चे भी बीमार हैं। विद्यालय प्रबंधन ने जर्जर भवन की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी है, साथ ही विभागीय टीम ने सर्वे भी किया है।
चंग: 3.25 करोड़ रुपये का दान देने के बावजूद भी बेटियां ठिठुरीं
2018 में, गांव चांग के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के दो मंजिला भवन को पीडब्ल्यूडी ने कंडम घोषित किया था। गांव के दानवीर लार्ड स्वराजपाल ने लगभग दो साल पहले सवा तीन करोड़ रुपये देकर नए घर बनाए, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका। विद्यालय में पहली से बारहवीं कक्षा तक करीब 425 विद्यार्थी हैं। प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर हो गया है, इसलिए दो शिफ्ट में कक्षाएं लग रही हैं और सुबह की प्रार्थना खुले में की जाती है।
बहल: खराब शौचालय और लाइब्रेरी
बहल की राजकीय मॉडल प्राइमरी पाठशाला की पुस्तकालय में पुस्तकों की कमी है। वहीं, राजकीय कन्या प्राथमिक स्कूल का शौचालय बदहाल है, जहां न तो पानी की सुविधा है और न ही सफाई का कोई साधन है। दोनों विद्यालयों में लगभग चार सौ विद्यार्थी पढ़ते हैं।
बावनीखेड़ा: राज्य पुरस्कार के बावजूद खुली कक्षाएं
बवानीखेड़ा के वीर शहीद गुलाब सिंह पीएमश्री राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय को राज्य स्तर पर स्वच्छता और मॉडल स्कूल श्रेणी में तीन पुरस्कार मिले हैं। बावजूद इसके, बालिकाओं की कक्षाएं यहां अभी भी खुले में दिखती हैं। विद्यालय में 720 विद्यार्थी हैं। विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शौचालय कम हैं और भवन को बारिश से भी नुकसान हुआ है।













